बदायूं के एचपीसीएल के दो अफसरों की प्लांट में निर्ममता से हत्या के बाद सैजनी में हुई बुलडोजर की कार्रवाई से शासन ने खुराफातियों को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है। हालांकि दबंग अजय का काली कमाई से बना किला तब ढह सका जब दो अफसरों की जान चली गई।
मंगलवार को दो बुलडोजरों ने अजय प्रताप सिंह और उसके ताऊ राकेश सिंह की अवैध मार्केट को रौंद डाला। इस कार्रवाई को देखने के लिए इलाके के हर उम्र के लोग यहां भीड़ लगाए रहे। इनमें से अधिकांश लोग अजय और उसके परिवार की दबंगई से अच्छी तरह वाकिफ थे। राजनीतिक व रसूखदार लोगों से अजय की नजदीकी का भी लोगों को पता था।
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कई घंटे तक चली कार्रवाई
– फोटो : अमर उजाला
कई लोगों ने अमर उजाला की टीम से बातचीत में यह स्वीकार किया कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि अजय के अवैध साम्राज्य पर इस तरह की कार्रवाई भी हो सकती है। वह बड़े लोगों के साथ उठता-बैठता था और बड़ी बातें करता था। पुलिसवालों से लेकर तहसील के स्टाफ तक से उसकी अच्छी दोस्ती थी। इलाके में कार्रवाई पुलिस अक्सर अजय से सलाह लेकर ही किया करती थी। ऐसे में उसका मार्केट टूटना बड़ी बात है। लोगों का यह भी कहना था कि देखो…अजय का रसूख टूट रहा है।
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एचपीसीएल प्लांट में हुआ था डबल मर्डर
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कुछ उम्रदराज लोगों का कहना था कि अजय के खिलाफ कंपनी के अधिकारी काफी पहले से शिकायत कर रहे थे। अगर यह कार्रवाई तब हुई होती तो शायद दोनों अफसरों को अपनी जान न गंवानी पड़़ती। वहीं उन्हें अब भी यह भय है कि कहीं अजय जेल से छूटकर या उसके गुर्गे दोबारा दहशत न फैला दें। इसलिए कोई भी खुलकर सामने नहीं आ रहा है।
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आरोपी अजय प्रताप सिंह
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जेल अस्पताल में भर्ती आरोपी अजय घटना के बारे में बंदियों से ले रहा जानकारी
जेल अस्पताल में भर्ती दो अफसरों की हत्या का आरोपी अजय प्रताप सिंह की हालत सामान्य है। लेकिन उसे घटना के बाद से क्षेत्र की गतिविधि जानने की लालसा दिख रही है। वह कभी अखबार मांग रहा है तो कभी टीबी चलवाने की गुहार जेल प्रशासन से लगा रहा है। बताया है कि उसके दोनों पैरों पर प्लास्टर लगा हुआ है। दोनों समय वह खाना भी खा रहा है।
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बदायूं दोहरा हत्याकांड
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12 मार्च को अपराह्न करीब दो बजे फिल्मी अंदाज में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट के उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता व सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद वह गाड़ी से मूसाझाग थाने पहुंचा और आत्म समर्पण कर दिया था।