आगरा में महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह और नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के बीच चल रहा विवाद शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार तक पहुंच गया। महापौर ने लखनऊ में सीएम को पत्र सौंपकर नगर आयुक्त पर ई-टेंडरिंग को दरकिनार कर ऑफलाइन टेंडर के जरिये चहेतों को ठेके बांटने और निगम को करोड़ों की वित्तीय हानि पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने पूरे प्रकरण की थर्ड पार्टी जांच की मांग की है।

मुख्यमंत्री से शनिवार को महापौर ने मुलाकात की। उन्हें सौंपे शिकायती पत्र में महापौर ने आरोप लगाया कि नगर आयुक्त ने नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 117 (6)बी का दुरुपयोग किया है। यह धारा केवल आपातकालीन स्थितियों के लिए है, लेकिन इसे सामान्य प्रक्रिया बनाकर 40 से 50 करोड़ रुपये के कार्य ई-टेंडरिंग के बजाय ऑफलाइन बॉक्स प्रणाली से आवंटित कर दिए गए।

दावा किया कि ऑफलाइन प्रक्रिया के कारण केवल 5 प्रतिशत तक की निम्न दरें मिलीं, जबकि ई-टेंडरिंग में प्रतिस्पर्धा होने पर निगम का काफी पैसा बचता। इस सुनियोजित प्रक्रिया से निगम को करीब 9 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। रोस्टर प्रणाली को ताक पर रखकर एक-एक ठेकेदार को 10-10 फाइलें आवंटित करने का भी आरोप लगाया गया है।

वार-पलटवार: किसने-क्या कहा

नगर आयुक्त लगातार निगम को वित्तीय हानि पहुंचा रहे हैं। मुख्य सचिव से शिकायत के बाद भी सुधार नहीं हुआ, इसलिए अब मुख्यमंत्री से शासन स्तर की किसी तीसरी एजेंसी से जांच की मांग की है। – हेमलता दिवाकर कुशवाह, महापौर

महापौर के आरोप झूठ का पुलिंदा हैं। सभी कार्य कार्यकारिणी से पास प्रस्तावों के आधार पर हुए हैं, जिसकी अध्यक्षता स्वयं महापौर ने की थी। जांच से सब स्पष्ट हो जाएगा। – अंकित खंडेलवाल, नगर आयुक्त



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