गणित के सवाल, भौतिक-रसायन के समीकरण या रीजनिंग। पहली बार में हल नहीं कर सके तो झट से आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद ली और सवाल सॉल्व। कुछ घंटों बाद दोबारा हल करने बैठे तो फिर वही हाल। एआई पर निर्भर होकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी ऐसी स्थिति से जूझ रहे हैं। बोर्ड परीक्षा की तैयारी प्रभावित होने से तनाव में आए छात्र-छात्राएं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लेने पहुंच रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि याददाश्त के लिए मस्तिष्क में कई न्यूरोट्रांसमीटर हैं। इनमें एसिटाइलकोलाइन हार्मोंस सीखने, याददाश्त, ध्यान और मांसपेशियां को नियंत्रित करता है। डोपामाइन अच्छा महसूस कराने वाला और प्रेरक, एकाग्रता और याददाश्त को मजबूत करता है। स्वयं किसी सवाल को हल करने पर हार्माेंस तेजी से सक्रिय होते हैं। इससे दिमाग में लंबे समय तक स्मरण रहता है।

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बिना प्रयास किए एआई से हल कराने पर तत्काल समझ में तो आता है लेकिन दिमाग में वह स्टोरेज नहीं होता। अभ्यास, लिखना-पढ़ना कम कर एआई पर निर्भर रहने से याददाश्त पर सीधा असर पड़ रहा है। इससे चंद घंटों में भूलने आधे-अधूरे याद रहने की समस्या बढ़ रही है। बोर्ड परीक्षा की तैयारियों में जुटे ऐसे विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है। टेलीमानस पर भी इसी तरह के रोजाना 10-15 कॉल आ रहे हैं। इनमें से अधिकांश की वजह यही है। सभी को लिखकर पढ़ने और अभ्यास पर जोर देने के लिए कहा जा रहा है।

मानसिक परेशानी हो तो 14416 मिलाएं

मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में टेलीमानस सेवा संचालित है। टोल फ्री नंबर 14416 पर फोन करने पर मानसिक परेशानियों का विशेषज्ञ फोन पर ही समाधान करते हैं। ये 24 घंटे सेवा संचालित रहती है। मानसिक परेशानियों से जूझ रहा कोई भी व्यक्ति इस नंबर पर फोन कर लाभ प्राप्त कर सकता है।

 



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