अंकित धान की ट्रॉली चोरी करने के आरोप में जेल में बंद था, जबकि डिंपी नाबालिग के अपहरण के मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत निरुद्ध था। पुलिस के मुताबिक बंदियों ने महिला बैरक के पास कंबलों की रस्सी में सरिया का एक टुकड़ बांधा और उसे दीवार के ऊपर बने पिलर से निकली सरिया में फेंक कर फंसा दिया। इसके बाद दोनों दीवार पर चढ़ गए और दूसरी तरफ खेतों में कूद कर भाग गए। वॅाच टॉवरों पर भी निगरानी नहीं हो रही थी, जिससे बंदियों को भागने में आसानी रही।
सोमवार सुबह 10 बजे जब जेल की बैरकों में बंदियों और कैदियों की गिनती हुई, तब दो बंदी कम होने की जानकारी हुई। इस घटना से जेल प्रशासन में खलबली मच गई। आनन-फानन कारागार पुलिसकर्मी बस स्टेशन व रेलवे स्टेशन पर दोनों बंदियों को खोजने लगे। जानकारी मिलने पर डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, एसपी विनोद कुमार जेल पहुंचे और कारागार अधीक्षक भीमसेन मुकुंद से पूछताछ की।
डीएम की संस्तुति पर शासन ने बैरक प्रभारी शिवेंद्र सिंह यादव, हेड जेल वार्डर शिवचरण, डिप्टी जेलर बद्री प्रसाद और जेलर विनय प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया और मामले की जांच कानपुर के डीआईजी जेल प्रदीप गुप्ता को सौंपी गई है। देर शाम डीआईजी जेल ने कारागार का निरीक्षण किया। पूरे मामले में जेल अधीक्षक की लापरवाही सामने आई है। डीआईजी ने बताया कि जांच के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
वॉच टावरों से नहीं हो रही थी निगरानी, योजनाबद्ध तरीके से भागे बंदी
कन्नौज जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर स्थित कारागार में बंदियों की निगरानी भगवान भरोसे है। जेल के चारों कोनों पर वॉच टॉवर तो बनाए गए हैं, पर उनमें कोई नहीं जाता है। यही वजह है कि 22 फीट ऊंची दीवार पर कंबलों से बनी रस्सी के सहारे दो विचाराधीन बंदी भाग और जेल प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। योजनाबद्ध तरीके से बंदी भागे हैं, इसकी कहानी वह रस्सी बता रही है जो कंबलों और बिछाने वाली चादरों समेत पौधों की टहनियों को लपेटकर बनाई गई थी।




