प्रगतिशील लेखक संघ से लंबे समय से जुड़े रहे हिंदी के प्रख्यात समालोचक वीरेंद्र यादव का शुक्रवार सुबह हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वे 76 वर्ष के थे। वे शहर के इंदिरा नगर में रहते थे। वीरेंद्र यादव कथा आलोचना में बराबर सक्रिय रहे। उनका जन्म 1950 में जौनपुर जिले में हुआ था।
उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में एमए किया था। छात्र जीवन से ही वामपंथी बौद्धिक व सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय हिस्सेदारी शुरू कर दी थी। उत्तर प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ के लम्बे समय तक सचिव एवं ‘प्रयोजन’ पत्रिका के सम्पादक रहे।
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जान हर्सी की पुस्तक ‘हिरोशिमा’ का अंग्रेज़ी से हिन्दी में अनुवाद किया। प्रेमचन्द सम्बन्धी बहसों और ‘1857’ के विमर्श पर हस्तक्षेपकारी लेखन के लिए विशेष रूप से चर्चित रहे। कई लेखों का अंग्रेज़ी और उर्दू में भी अनुवाद किया। आलोचना के क्षेत्र में उन्हें वर्ष 2001 के ‘देवीशंकर अवस्थी सम्मान’ से सम्मानित किया गया था।