आगरा सदर तहसील में पांच सब-रजिस्ट्रार दफ्तर हैं। यहां औसतन रोज 300 से 400 दस्तावेज पंजीकृत होते हैं। सोमवार से नई व्यवस्था लागू होने के कारण करीब 100 बैनामा पंजीकृत हो सके। संपत्ति खरीदार और विक्रेता के अलावा गवाह का आधार कार्ड रजिस्ट्री के लिए अनिवार्य किया गया है। आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी से व्यक्ति का सत्यापन किया जा रहा है। फिर आधार में दर्ज बायोमैट्रिक मिलान के लिए अंगूठा स्कैन होता है। इस प्रक्रिया में करीब एक से डेढ़ घंटे का समय लग रहा है। सोमवार को रजिस्ट्री कराने आए लोगों के पास आधार कार्ड तो था लेकिन मोबाइल नंबर से लिंक नहीं होने के कारण उनकी रजिस्ट्री नहीं हो सकी।

सदर तहसील बार एसोसिएशन महासचिव अरविंद दुबे का कहना है कि निबंधन विभाग ने नई व्यवस्था लागू करने से पहले कर्मियों और अधिकारियों का प्रशिक्षण नहीं कराया। 12 बजे तैयार दस्तावेज शाम 5 बजे पंजीकृत हो सका। बड़ी संख्या में लोग बिना रजिस्ट्री कराए लौट गए। जिन सौदाें में नकदी का लेनदेन हो चुका है, रजिस्ट्री नहीं होने से वह प्रभावित हो सकते हैं। सहायक महानिरीक्षक निबंधन योगेश कुमार ने बताया कि पहले दिन रजिस्ट्री में कमी आई है। नई व्यवस्था लागू हो गई है। दो से तीन दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी।

फर्जी व्यक्ति नहीं कर सकेगा खरीद-बिक्री

सहायक महानिरीक्षक निबंधन योगेश कुमार के अनुसार कोई भी फर्जी व्यक्ति अब किसी संपत्ति की खरीद-फरोख्त नहीं कर सकेगा। पहले व्यक्ति का आधार और मोबाइल नंबर से सत्यापन होगा। फिर बायोमैट्रिक अंगूठा से मिलान होगा। गवाह के लिए भी आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य हो गया है।

फर्जी बैनामा कांड में चल रही जांच

रजिस्ट्री दफ्तर के केंद्रीय अभिलेखागार में फर्जी बैनामा कांड सामने आ चुका है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) जांच कर रही है। आधा दर्जन प्राथमिकी दर्ज हैं। संपत्तियों की फर्जी ढंग से खरीद-फरोख्त के आरोप में कई लोग जेल जा चुके हैं। केंद्रीय अभिलेखागार में सरकारी रिकाॅर्ड गायब है। रजिस्ट्री की जिल्द, बही और इंडेक्स में पृष्ठ फटे हुए हैं। फटे हुए पृष्ठ की जगह जालसाजी कर मिलते-जुलते पृष्ठ लगाए हुए मिले थे।

 



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