आगरा के केंद्रीय हिंदी संस्थान में एक प्रोफेसर उमापति दीक्षित फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के मामले में फंस गए हैं। कुलसचिव डाॅ. अंकुश आंधकर की शिकायत पर थाना न्यू आगरा में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसमें धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करनी की धाराएं लगाई गई हैं।

कुलसचिव की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर में लिखा गया है कि मामले में संस्थान की ओर से एक आंतरिक जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने पूर्व अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। हालांकि प्रो. उमापति दीक्षित जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए। जांच रिपोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेज को फर्जी बताया गया है। इसकी फाॅरेंसिक जांच कराने की संस्तुति की गई है।

आरोप लगाया गया है कि फर्जी दस्तावेज के माध्यम से संस्थान को गुमराह किया। समिति ने संस्तुति दी है कि 5 अगस्त 2022 को निर्गत किया गया अनापत्ति प्रमाण पत्र संस्थान प्रशासन के अभिलेख में उपलब्ध है जो पूर्णत: सत्य है। जबकि प्रो. उमापति दीक्षित की ओर से प्रस्तुत प्रमाण पत्र 4 अगस्त 2022 को संस्थान प्रशासन के अभिलेख में उपलब्ध नहीं है।

संस्थान प्रशासन ने आरोप लगाया है कि उमापति दीक्षित ने फर्जी एनओसी से गुमराह करने का प्रयास किया। वहीं, प्रो. उमापति ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने संस्थान के निदेशक के विरुद्ध शिक्षा मंत्रालय में शिकायत की है। निदेशक की ओर से कथित रूप से फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त करने का मामला उठाने के बाद उनके खिलाफ साजिशन यह कार्रवाई की गई है। इस संबंध में उन्होंने जून 2025 में जिला न्यायालय आगरा और नवंबर 2025 में उच्च न्यायालय में याचिकाएं भी दाखिल की हैं। विवेचना में सच्चाई सामने आ जाएगी। थाना न्यू आगरा के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।



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