प्रदेश में चल रही नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट (एनएमएमयू) बंद होने के कगार पर है। मोबाइल यूनिट में कार्यरत डॉक्टरों और कर्मचारियों को करीब तीन माह से मानदेय नहीं मिल रहा है। ऐसे में वे काम छोड़ने के लिए विवश हैं। यह स्थिति तब है, जब मरीजों को बेहतर सेवा देने के लिए सरकार की ओर से प्रमाण पत्र भी दिया जा चुका है।

प्रदेश के 54 जिलों में 172 एनएमएमयू चल रही हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) के आदेश पर इन्हें संबंधित जिलों में अलग- अलग गांवों में मरीजों के उपचार के लिए भेजा जाता है। इसमें डॉक्टर, स्टॉफ नर्स, लैब टेक्निशियन, फर्मासिस्ट और चालक होते हैं। यह यूनिट गांव में जाकर मरीजों का निशुल्क उपचार, जांच और दवा देती है।

 गंभीर मरीजों को चिन्हित करके जिला अस्पताल अथवा मेडिकल कॉलेज रेफर करती है। इस यूनिट में कार्यरत स्टाफ को नवंबर 2025 से मानदेय का भुगतान नहीं हो रहा है। ऐसे में तमाम मोबाइल वैन खड़ी होने लगी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वैन संचालित करने वाली कंपनी जल्द ही भुगतान होने का वादा कर रही है, लेकिन मानदेय नहीं मिलने की वजह से उनकी घर गृहस्थी प्रभावित हो रही है। 

वे बिना मानदेय के अब आगे कार्य करने की स्थिति में नहीं है। यह टीम ग्रामीण इलाके में लोगों के उपचार के साथ ही संक्रामक रोग नियंत्रण अभियान, दस्तक अभियान सहित विभिन्न कार्यक्रमों में गांव- गांव हिस्सा लेती है। गोरखपुर, बस्ती, बहराइच, बांदा जिला कारागार सहित विभिन्न जेलों में कैदियों की जांच व इलाज के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

 



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