विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि केन्द्र सरकार बिजली (संशोधन) बिल 2025 और बिजली के निजीकरण के लिए वित्तीय पैकेज का प्रस्ताव संसद के आगामी बजट सत्र में लाने की तैयारी में है। इसे स्वीकार्य नहीं किया जाएगा।

संघर्ष समिति ने बताया कि बिजली के मामलों की संसदीय समिति की 18 दिसंबर को बैठक हुई थी। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की थी। इस बैठक में ही यह निर्णय लिया गया है कि बिजली (संशोधन) बिल 2025 को संसद के बजट सत्र में पारित कराया जाय। संघर्ष समिति ने बताया कि इस वित्तीय पैकेज के तहत प्रदेश सरकारों को तीन विकल्प दिए जाएंगे।

पहला विकल्प यह होगा कि राज्य के विद्युत वितरण निगमों की 51% इक्विटी बेंच दी जाए और विद्युत वितरण निगमों को पीपीपी मॉडल पर चलाया जाए। दूसरा विकल्प यह होगा कि विद्युत वितरण निगमों की 26% इक्विटी बेची जाए लेकिन प्रबंधन निजी क्षेत्र का होगा। तीसरा विकल्प यह होगा कि विद्युत वितरण निगमों को स्टॉक एक्सचेंज में एनलिस्ट किया जाए।

संघर्ष समिति ने बताया कि बजट सत्र में लाए जाने वाले वित्तीय पैकेज की इन तीनों शर्तों का एक ही तात्पर्य है बिजली का निजीकरण किया जाए। बिजली कर्मचारी ऐसे किसी प्रस्ताव का पुरजोर विरोध करेंगे। संघर्ष समिति ने बताया की बिजली के मामलों की संसदीय समिति की 03 फरवरी को बैठक हो रही है। उम्मीद की जाती है कि इसी बैठक में वित्तीय पैकेज और बिल 2025 के ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे इसे संसद के इसी बजट सत्र में रखा जा सके।



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