यूपी के चित्रकूट में कपड़ा व्यापारी के बेटे के अपहरण के बाद जब पहली कॉल व्यापारी के पास आई तो उन्होंने किसी की शरारत या मजाक समझा। सात मिनट के भीतर उसी नंबर से आई दूसरी कॉल आई। उठाते ही सुनाई दिया कि बेटे को जिंदा देखना है तो 40 लाख रुपये लेकर बरगढ़ घाटी पहुंचो…।
आनन-फानन दुकान बंद की और बेटे के बारे में घर पर फोन करके जानकारी की तो घरवाले भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। बरगढ़ के कपड़ा कारोबारी अशोक कुमार केसरवानी का 13 वर्षीय पुत्र आयुष, रोज की तरह गुरुवार शाम करीब चार बजे कोचिंग पढ़ने बड़े भाई आदित्य के साथ घर से निकला
था।
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आयुष की फाइल फोटो
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चाचा के घर पतंग उड़ा रहा था आयुष
पुलिस के मुताबिक, लौटते समय वह रोज की तरह चाचा के घर चला गया और वहां छत पर पतंग उड़ा रहा था। इसी बीच पूर्व किरायेदार के कर्मचारी ने उसे बाइक चलाने के लिए बुलाया और साथ ले गया। आयुष के पूर्व किरायेदार के कर्मचारी के साथ जाने की परिवार को भनक नहीं थी।
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आयुष के शव को लेकर जाते परिजन
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रात करीब 8:30 बजे व्यापारी के पास आया पहला फोन
रात करीब 8:30 बजे व्यापारी अशोक के पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने व्यापारी से उसके बेटे के बारे में पूछा तो उन्होंने शरारत या मजाक समझा। कुछ ही मिनटों के भीतर, उसी नंबर से दोबारा कॉल आई।
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शौचालय में दफन मिला आयुष का शव, आयुष की फाइल फोटो
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
’40 लाख रुपये लेकर बरगढ़ घाटी पहुंचो…’
इस बार अपहरणकर्ताओं का लहजा बदला था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आयुष उनके कब्जे में है और यदि उसे जीवित और सुरक्षित देखना चाहते हैं तो 40 लाख रुपये लेकर बरगढ़ घाटी पहुंचो। यह सुनते ही व्यापारी के होश उड़ गए।
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कारोबारी के बेटे की अपहरण के बाद हत्या पर फूटा लोगों का गुस्सा
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रकम लेकर तुरंत भागने की थी योजना
बरगढ़ में हुए आयुष अपहरण व हत्याकांड की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने आयुष की हत्या फिरौती मांगने से काफी पहले ही कर दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आठ के करीब हत्या होना सामने आया है। पहली कॉल 8:29 तो दूसरी कॉल 8:37 बजे की गई। एसपी अरुण कुमार का कहना है कि इससे साफ है कि आरोपी फिरौती की रकम लेकर तुरंत भागने की फिराक में थे।