आगरा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए आयोजित स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी आधारित प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने स्मार्ट बोर्ड की जमीनी हकीकत सामने रखी। शिक्षकों का कहना था कि प्रशिक्षण में स्मार्ट बोर्ड चलाने की जानकारी दी जा रही है, जबकि कई विद्यालयों में बोर्ड अब तक चालू ही नहीं हुए हैं।
शिक्षकों ने बताया कि उनके स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड केवल दीवारों पर टंगे हैं। कई बार शिकायत के बावजूद न तो इंस्टॉलेशन पूरा हुआ और न ही संचालन शुरू हो सका। कुछ शिक्षिकाओं ने इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने की समस्या उठाई, वहीं कुछ ने बताया कि स्मार्ट बोर्ड के लिए सिम कार्ड तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। बुधवार को आयोजित प्रशिक्षण शिविर के एक सत्र के बाद उप शिक्षा निदेशक एवं डायट प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने शिक्षकों से संवाद किया और स्मार्ट क्लास के लाभ बताए। जब उन्होंने समस्याओं के बारे में पूछा तो बराैली अहीर के अकबरपुर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक गिरीश कुमार शर्मा ने बताया कि उनके विद्यालय में स्मार्ट बोर्ड अब तक चालू नहीं हुआ है। इस पर कई अन्य शिक्षकों ने भी यही समस्या साझा की।
डायट प्राचार्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समस्याओं को लिखित रूप में संकलित कर प्रारूप तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से समन्वय कर समाधान कराया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ विद्यालयों में हाल ही में स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन इंस्टॉलेशन लंबित है, जिसे सेवा प्रदाता कंपनी के सहयोग से शीघ्र पूरा कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जिले के 427 विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध कराए गए हैं। आईसीटी लैब स्थापित की जा चुकी हैं। प्रत्येक विद्यालय से दो शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे स्मार्ट क्लास संचालन में दक्ष बन सकें। प्रशिक्षण में तेजेंद्र सिंह, अजय कुमार शर्मा, अनिल कुमार, जयकांत और जितेंद्र सिंह ने स्मार्ट बोर्ड के रखरखाव, संचालन और विभिन्न एप्स के उपयोग की जानकारी दी। प्रशिक्षण में 100 शिक्षकों ने भाग लिया। संचालन सेवारत प्रभारी डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने किया। इस अवसर पर प्रवक्ता अनिल कुमार, यशवीर सिंह, हिमांशु सिंह, कल्पना सिन्हा, पुष्पेंद्र सिंह, रंजना पांडे, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, रचना यादव, यशपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
