Terror funding on the name of social work, ats searching Dr Abdul Gaffar.

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : iStock

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बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या मुसलमानों की तस्करी करने वाले सिंडिकेट को सामाजिक कार्यों के नाम पर ब्रिटेन और जर्मनी की संस्थाओं के जरिये टेरर फंडिंग की जा रही थी। पाकिस्तान, सीरिया, तुर्किये आदि देशों में सक्रिय आतंकी संगठन जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए यह तरीका अपना रहे थे। एटीएस ने दिल्ली के डॉ. अब्दुल गफ्फार की तलाश तेज कर दी है, जिसके बैंक खाते में यह रकम आती थी।

गौरतलब है कि एटीएस ने सोमवार को इस सिंडिकेट से सदस्य मोहम्मद अब्दुल अव्वल को नई दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। असोम निवासी अब्दुल अव्वल लखनऊ के नदवा कॉलेज से 12वीं करने के बाद दिल्ली में फिनो बैंक के एजेंट के तौर पर काम कर रहा था।

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उसने पूछताछ में बताया था कि डॉ. अब्दुल गफ्फार ने उससे फिनो बैंक में रोहिंग्या, बांग्लादेशी, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले मुस्लिमों के नाम पर खाते खुलवाए थे, जिसमें वह अपने एनजीओ के एफसीआरए खाते में आने वाले विदेशी धन को ट्रांसफर करता था।

डॉ. गफ्फार के एनजीओ सन शाइन हेल्थ एंड सोशल वेलफेयर ट्रस्ट के एफसीआरए खाते में यूरोपीय देशों से लगभग 20 करोड़ रुपये आए थे। इसका उपयोग देश-विरोधी गतिविधियों में हो रहा था। एडीजी एटीएस मोहित अग्रवाल ने बताया कि इस सिंडिकेट के बाकी सदस्यों की तलाश की जा रही है। एटीएस जल्द ही अब्दुल अव्वल को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी।



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