भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार देर रात उत्तर प्रदेश के 14 जिलों में जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा कर दी। बुधवार रात 14 जिलाध्यक्ष के नामों का एलान प्रदेश चुनाव अधिकारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय ने किया। भाजपा ने जिलाध्यक्ष का जिले स्तर पर चुनाव कराया था। इस चुनाव के बाद नामों का एलान लंबे समय से अटका हुआ था। इसी क्रम में बुधवार को 14 जिलों के अध्यक्षों का ऐलान किया गया।
संगठन पर्व के अंतर्गत भारतीय जनता पार्टी, उत्तर प्रदेश के जिला अध्यक्षों के निर्वाचन के क्रम में निम्न जिलाध्यक्षों के निर्वाचन की घोषणा की जाती है।
आप सभी को हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं। pic.twitter.com/AjuiG25O3V
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) November 26, 2025
अलीगढ़ में जिलाध्यक्ष पद पर फिर से जट्टारी के जिला पंचायत सदस्य कृष्णपाल सिंह लाला व महानगर अध्यक्ष पर इंजी.राजीव शर्मा के नाम घोषित कर दिए। खबर आते ही दोनों खेमों में खुशी की लहर दौड़ गई। देर रात बधाई व स्वागत का सिलसिला शुरू हो गया। बता दें कि दोनों पहली बार 16 सितम्बर 2023 अध्यक्ष बने थे।
भाजपा संगठन में वर्ष की शुरुआत में संगठन चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई थी। तब दोनों पदों के लिए 50 से अधिक दावेदारों ने दावेदारी पेश की थी। मगर मार्च में किन्ही कारणों से चुनाव टल गया। हालांकि चुनाव टलने की कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं हुई थी। मगर प्रदेश के अधिकांश जिलों अध्यक्ष घोषित कर दिए थे। जिनमें मंडल के अलीगढ़, एटा व हाथरस को छोड़ा गया था। अब बुधवार देर रात 14नए अध्यक्ष घोषित किये हैं। जिनमें हाथरस में बदलाव कर प्रेम सिंह को जिम्मेदारी दी है।
मेरठ में खेला पिछड़ा वर्ग के नेता पर दांव
मेरठ में अति पिछड़ा वर्ग के हरवीर पाल को जिलाध्यक्ष घोषित कर दिया। भाजपा के क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी गजेंद्र शर्मा ने बताया कि पश्चिम क्षेत्र में मेरठ जिला इकाई में हरवीर पाल को जिलाध्यक्ष व हापुड़ में कविता माधरे को जिलाध्यक्ष घोषित किया है।
मेरठ में हरवीर पाल की गिनती अति पिछड़ा वर्ग के दिग्गज नेताओं में होती है। वे उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य रह चुके हैं और इस समय भाजपा पिछड़ा वर्ग के क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं। भावनपुर के निवासी हरवीर पाल तीन बार जिला इकाई में महामंत्री रहे हैं और लंबे समय से जिलाध्यक्ष पद के दावेदार थे।
भाजपा ने हरवीर को जिलाध्यक्ष बनाकर अति पिछड़ा कार्ड चला है। इससे पार्टी के उन बड़े दिग्गजों को करारा झटका लगा है, जो अपने समर्थकों के लिए लॉबिंग में लगे थे। इसी खींचतान के कारण ही महानगर अध्यक्ष के साथ जिलाध्यक्ष की घोषणा नहीं हो पाई थी।
