मंदिरों की यात्रा को धार्मिक पर्यटन कहना गलत है। इसकी जगह भारतीय परंपरा के अनुरूप शब्दों तीर्थयात्रा, आस्था यात्रा या तीर्थ दर्शन का प्रयोग करना ही उचित है। यह कहना है, सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन का। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है।
उन्होंने पत्र में लिखा है कि प्रदेश सरकार ने पिछले वर्षों में अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, घाटों का सौंदर्यीकरण, श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं और विशाल धार्मिक आयोजन किए हैं। सामान्यतः पर्यटन शब्द का प्रयोग उन यात्राओं के लिए किया जाता है, जिनका उद्देश्य मनोरंजन, अवकाश, सैर-सपाटा या प्राकृतिक-ऐतिहासिक स्थलों का आनंद लेना होता है।
मंदिरों और तीर्थ स्थलों की यात्रा का मूल उद्देश्य श्रद्धा, दर्शन, साधना और आत्मिक उन्नति होती है। भारत की प्राचीन परंपरा में ऐसी पवित्र यात्राओं को तीर्थयात्रा कहा गया है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश में कुंभ मेला, काशी विश्वनाथ धाम, श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा तीर्थ स्थित हैं। प्रतिवर्ष करोड़ों श्रद्धालु दर्शन और आस्था के भाव से आते हैं। इसलिए इन यात्राओं को धार्मिक पर्यटन कहना गलत है। तीर्थयात्रा या आस्था यात्रा जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाए तो यह भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं के अधिक अनुरूप होगा।
