अंबेडकरनगर के मालीपुर थाना क्षेत्र में साइबर ठगों द्वारा गरीब मजदूरों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर 94 लाख रुपये की हेराफेरी करने का मामला सामने आया है। इस बड़े रैकेट का खुलासा तब हुआ जब गुजरात पुलिस एक मामले की जांच के सिलसिले में कोठीभार गांव पहुंची। पुलिस ने इस मामले में दो स्थानीय युवकों और झारखंड के दो अज्ञात जालसाजों सहित कुल चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

मामले के मुख्य शिकायतकर्ता और पेशे से राजमिस्त्री बहरैची के अनुसार, अगस्त 2025 में गांव के ही सोनू और अमरजीत नाम के युवकों ने उन्हें कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का लालच दिया था। उन्होंने बताया कि क्रिकेट सट्टेबाजी से जीती गई रकम उनके खाते में आएगी, जिसके बदले उन्हें कमीशन और खाता खुलवाने के एवज में एक हजार रुपये दिए जाएंगे। इसी लालच में आकर बहरैची ने जुलाई 2025 में इंडियन ओवरसीज बैंक, पटेलनगर अकबरपुर में अपना खाता खुलवाया। आरोप है कि सोनू और अमरजीत ने बहरैची के अलावा गांव के रामतीरथ, उनकी पत्नी मिथिलेश, रामसकल, मनीषा और उनकी पत्नी बलराम सहित सात लोगों के खाते भी खुलवाए।

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आरोप है कि जालसाजों ने इन मासूम मजदूरों के खातों का उपयोग कर गुजरात, झारखंड, राजस्थान (जोधपुर) और बिहार जैसे राज्यों से साइबर ठगी की रकम का लेनदेन किया। घटना की जानकारी होने पर बहरैची ने 15 फरवरी को आरोपी सोनू, अमरजीत और झारखंड निवासी लकी उर्फ सुजीत सिंह व खुशबू के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस अब उन सभी संदिग्ध म्यूल खातों (दूसरों के नाम पर इस्तेमाल होने वाले खाते) की जांच कर रही है जिनका उपयोग इस गिरोह ने किया था।

स्थानीय सिस्टम को पता तक नहीं चल सका

चाैंकाने वाली बात यह है कि मात्र सात महीनों के भीतर इन खातों से 94 लाख रुपये पार कर दिए गए। स्थानीय सिस्टम को ठगी का पता तब चला, जब गुजरात में दर्ज एक साइबर अपराध की जांच करते हुए 6 फरवरी को वहां की पुलिस कोठीभार गांव पहुंची। पुलिस ने जब रामतीरथ के घर पूछताछ की, तब ग्रामीणों को अहसास हुआ कि उनके खातों का इस्तेमाल अवैध कार्यों के लिए किया जा रहा है।



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