विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बावजूद जिले की मतदाता सूची में खामियों की शिकायतों ने चुनावी रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है। फाॅर्म भरने के बाद भी सैकड़ों मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं। वहीं आपत्तियों के बावजूद अपात्रों के नाम न कटना सियासी दलों के लिए चिंता का सबब बन गया है। इससे निबटने के लिए भाजपा ने प्लान बी बनाकर काम शुरू कर दिया है।
भाजपा संगठन ने अंतिम प्रकाशित मतदाता सूची का गहन अध्ययन शुरू किया है। महानगर और जिला स्तर पर टोलियां गठित कर बूथवार डाटा का मिलान किया जा रहा है। पार्टी पदाधिकारियों का मानना है कि बड़ी संख्या में ऐसे समर्थक हैं, जिन्होंने फार्म-6 भरकर जमा किया लेकिन उनका नाम सूची में नहीं जोड़ा गया।
वहीं, विरोधियों की गड़बड़ियों और मृतक या शिफ्ट हो चुके मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फार्म-7 भरा गया था, मगर प्रशासन ने उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। ऐसे में भाजपा अब वंचित मतदाताओं की सूची तैयार कर रही है। बूथ अध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे घर-घर जाकर वास्तविक स्थिति का पता लगाएं। जिन लोगों के नाम कट गए हैं या नहीं जुड़े हैं, उनका ब्योरा जुटाकर निर्वाचन कार्यालय को सौंपा जाएगा।
पार्टी का लक्ष्य है कि आगामी चुनाव से पहले एक भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे। पार्टी के महानगर महासचिव हेमंत शर्मा ने बताया कि प्रशासन को आपत्तियों के साथ नए फाॅर्म की सूची सौंपी गई थी, लेकिन निस्तारण में पारदर्शिता की कमी रही। अब तथ्यों के साथ दोबारा प्रशासन के समक्ष पक्ष रखा जाएगा।
शहरी सीटों पर है ज्यादा मुश्किल
आंकड़ों के अनुसार शहरी विधानसभा सीटों आगरा उत्तर, दक्षिण, कैंट और ग्रामीण में मतदाताओं के नाम बड़े स्तर पर कटे हैं। आगरा दक्षिण में 27 अक्तूबर, 2025 को कुल 3,70,099 मतदाता थे जो 10 अप्रैल, 2026 की अंतिम सूची में घटकर 2,75,069 रह गए। इसी तरह आगरा उत्तर में 4,54,175 से घटकर 3,33,439 और आगरा कैंट में 4,82,966 से कम होकर 3,35,784 मतदाता रह गए हैं। शहरी क्षेत्रों में नए नाम जोड़ने की रफ्तार भी धीमी रही। आगरा उत्तर में कुल 32,174 और दक्षिण में 23,430 नए वोट ही जुड़ सके।
