स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में शासनादेश और नियमों के उलट मानक प्रक्रिया (एसओपी) की धज्जियां उड़ाते हुए मरणोपरांत वसीयतें पंजीकृत हो गई। इस तरह अरबों रुपये की संपत्तियों का हस्तांतरण हो गया। इस खेल में उप निबंधकों की भूमिका कठघरे में है। मरणोपरांत वसीयतों के पंजीकरण में एसओपी के उल्लंघन की शिकायत शासन तक पहुंचने के बाद जिलाधिकारी अरविंद बंगारी ने मामले में जांच बैठाई है।
डीएम ने सहायक महानिरीक्षक निबंधन योगेश कुमार को एसओपी का पालन न होने और वसीयतों के पंजीकरण की जांच के आदेश दिए हैं। शिकायतकर्ता दिलीप सिंह ने बताया कि मरणोपरांत वसीयत पत्र का पंजीकरण सामान्य लेखपत्रों से अलग होता है। इनका अधिक गहनता से परीक्षण होता है जिससे कि मृतक के नैसर्गिक उत्तराराधिकारियों से धोखाधड़ी नहीं हो सके। लेकिन, उप निबंधक तृतीय, चतुर्थ और द्वितीय कार्यालय में वर्ष 2024-25 में मरणोपरांत वसीयतों में शासनादेश और रजिस्ट्रेशन एक्ट का घोर उल्लंघन किया गया।
इन वसीयतों के पंजीकरण पर उठे सवाल
– उप निबंधक तृतीय कार्यालय में भरत लाल शर्मा पुत्र राम बहादुर शर्मा निवासी नरहौली, बाह के नाम 27 फरवरी 2025 को मरणोपरांत वसीयत का पंजीकरण 117/2025 पर हुआ।
– उप निबंधक द्वितीय कार्यालय में मरणोपरांत वसीयत का पंजीकरण सुनील शर्मा पुत्र हरीश चंद शर्मा निवासी लाजपत कुंज के नाम दिनांक 21 मार्च 2024 को विलेख पत्र संख्या 148/2024 पर हुआ। – उप निबंधक तृतीय कार्यालय में दिनेश कुमार पुत्र बैनीराम निवासी लकावली का मरणोपरांत वसीयत पंजीकरण 15 जून 2024 को विलेख संख्या 326/2024 पर हुआ।
– उप निबंधक चतुर्थ कार्यालय में दिनेश कुमार पुत्र बैनीराम निवासी लकावली का मरणोपरांत वसीयत पंजीकरण 15 जून 2024 को विलेख संख्या 327/2024 पर हुआ।
अभिलेखागार में हो चुका है फर्जीवाड़ा
निबंधन भवन के केंद्रीय अभिलेखागार में फर्जी बैनामा कांड हो चुका है। एसआईटी मामले की जांच कर रही है। रिकाॅर्ड कीपर सहित एक दर्जन से अधिक लोग जेल जा चुके हैं। अभिलेखागार में रखे रिकाॅर्ड में भूमाफिया ने सेंध लगाई। अभिलेखागार में रखे स्याहा, इंडेक्स और जिल्द के पन्ने फाड़े गए। असली पन्नों की जगह जाली पन्ने चिपकाए। ऐसे करीब 100 से अधिक दस्तावेजों में फर्जीवाड़े की आशंका पर जांच चल रही है।
शासनादेश का हो रहा उल्लंघन
मरणोपरांत वसीयत पंजीकरण के लिए 10 अगस्त 2020, 23 दिसंबर 2022 और 20 फरवरी 2024 को महानिरीक्षक निबंधन ने उप निबंधकों के लिए एसओपी तय की थी। इस संबंध में डीएम अरविंद बंगारी का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है। एसओपी का पालन नहीं हुआ होगा, तो संबंधित के विरुद्ध रिपोर्ट शासन भेजी जाएगी।
