देश भर में कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्यता को लेकर चल रहे मामले के बीच माध्यमिक शिक्षा विभाग ने भी अपने यहां कक्षा छह से 12 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के टीईटी व सीटेट होने के बारे में जानकारी मांग ली है। हालांकि इसके लिए हाईकोर्ट में चल रहे केस का हवाला दिया गया है।

सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के सेवा में बने रहने या पदोन्नति के लिए टीईटी अनिवार्य किया था। इसके बाद से देश भर के शिक्षक संगठन इसके विरोध में हैं। कई संगठनों ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन भी किया तो कुछ ने देशभर में सांसदों को ज्ञापन देकर इससे राहत देने की मांग उठाई।

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इसी बीच माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को पत्र भेजकर ऐसे विद्यालय जहां कक्षा छह से 12 तक की पढ़ाई कराई जाती है। इसमें अध्यापन कराने वाले शिक्षकों का नाम व योग्यता का विवरण मांगा है। इसमें जिले का नाम, विद्यालय का नाम, पढ़ रहे छात्रों की संख्या, शिक्षक का नाम, शैक्षिक योग्यता व सीटेट-टीईटी उत्तीर्ण हैं या नहीं, इसके बारे में निर्धारित प्रोफार्मा पर जानकारी मांगी गई है।

उन्होंने 14 जनवरी तक इसके बारे में जानकारी मांगी है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने कहा कि इसके पीछे उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में योजित रिट याचिका का हवाला दिया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सहायक अध्यापक भर्ती के लिए लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयन प्रक्रिया चल रही है। इसे लेकर याचिका दाखिल की गई है। इसमें प्रभावी पैरवी के लिए यह जानकारी मांगी गई है।

हालांकि शिक्षकों में यह चर्चा है कि चूंकि कक्षा एक से आठ तक के लिए टीईटी अनिवार्य किया गया है। इसी वजह से विभाग छह से 12 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के बारे में जानकारी जुटा रहा है।



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