पंजाब के जालंधर की फर्म के बीज से 29 किसानों की फसल खराब हो गई। उनके अच्छे उत्पादन की चाह के उलट साल भर की मेहनत और लागत भी डूब गई। उन्हें करीब 60 लाख रुपये का घाटा हुआ है। यह बीज कृषि वैज्ञानिकों की जांच में रोगग्रस्त और उपजाऊ नहीं निकला। इसमें अधिकर किसान किरावली तहसील के है।
29 किसानों ने जिलाधिकारी से फर्म के बीज अंकुरित न होने और उपजे पौधे के रोगग्रस्त की होने की शिकायत की थी। इस पर कृषि विभाग को जांच के निर्देश दिए थे। कृषि विभाग ने जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित की। इसमें कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी से वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ़ राजेंद्र सिंह चौहान, उद्यान विज्ञान से एसएमएस अनुपम दुबे, मृदा विज्ञान एसएमएस विकास सेठ और उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी विकास सेठ को नामित किया जिन्होंने खेतों पर जाकर जांच की।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ़ राजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि खेतों में 15 से 20 फीसदी बीज अंकुरित नहीं हुआ। शेष जो कंद अंकुरित हुए, उनके पौधे रोगग्रस्त, असमान वृद्धि और कमजोर मिले। किसानों का खेत प्रबंधन कृषि पद्धत्ति के अनुरूप था। ऐसे खराब बीज से उत्पादन नहीं होगा।
गांव सामरा के किसान बच्चू सिंह ने बताया कि जालंधर फर्म के प्रतिनिधि से आलू बीज के 20 कट्टे लिए थे जिनमें करीब दो कच्चे बीघा खेत बुआई हो गई। अधिकतर पौधे उपजे ही नहीं, जो अंकुरित हुए, रोग ग्रस्त हैं। रोग रोकथाम के लिए 25 हजार की दवा डाली, लेकिन लाभ न मिला। पूरे साल की मेहनत और लागत डूब गई। खेड़ा गौरई के किसान रविंद्र शुक्ला का कहना है कि मैंने 100 पैकेट खरीदे थे। फर्म के प्रतिनिधि ने अच्छे बीज का वादा किया था लेकिन इस बीज से तो खेत ही बर्बाद हो गया। लाखों रुपये की लागत लग गई। आगे की फसलों के लिए नया बीज भी नहीं पैदा हो पाएगा।
