यमुना एक्सप्रेस वे पर झपकी और रफ्तार का कहर लगातार जारी है। हादसों के बाद सुरक्षा के इंतजाम के लिए कवायद तो बहुत होती है लेकिन इनका असर धरातल पर नजर नहीं आता है। चालक रात के समय लगातार वाहन चलाते हैं। इस वजह से मथुरा, हाथरस और आगरा में कई बार सड़क दुर्घटनाओं में लोग अपनी जान गवां चुके हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान के अनुसार रात 1 बजे से सुबह 5 बजे के बीच मानव शरीर की जैविक घड़ी (बॉडी क्लॉक) नींद की अवस्था में होती है। इसी समय थकान, उनींदापन और प्रतिक्रिया क्षमता में कमी सबसे अधिक होती है। यमुना एक्सप्रेस वे पर चार पहिया वाहनों के लिए गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा और कुछ श्रेणियों के लिए इससे अधिक निर्धारित है। अधिक गति में यदि चालक की आंख कुछ सेकंड के लिए भी बंद हो जाए तो वाहन सैकड़ों मीटर आगे बढ़ चुका होता है।
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यमुना एक्सप्रेस वे
– फोटो : iStock
इससे दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। तड़के के समय सड़क लगभग खाली रहती है। चालक को लगता है कि रास्ता साफ है। इस कारण चालक गति बढ़ा देते हैं। यही समय शरीर की सबसे अधिक थकान का होता है। कम ट्रैफिक और अधिक रफ्तार का यह मेल खतरनाक साबित होता है।
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यमुना एक्सप्रेस वे
– फोटो : अमर उजाला
कई बस और ट्रक चालक बिना पर्याप्त विश्राम के कई-कई घंटे वाहन चलाते रहते हैं। थकान धीरे-धीरे बढ़ती है। अंत में झपकी या ध्यान भंग का कारण बनती है। पिछले वर्षों में एक्सप्रेस वे पर होने वाली कई दुर्घटनाओं में चालक की झपकी या थकान मुख्य कारण रही है।
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यमुना एक्सप्रेस वे
– फोटो : संवाद
यह हैं प्रमुख कारण और समाधान
– सिर्फ 3 से 4 सेकंड की माइक्रो-नींद 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार में चल रहे वाहन को लगभग 80 से 100 मीटर आगे ले जाती है। बिना किसी नियंत्रण के। यह दूरी किसी भी वाहन से टकराने के लिए पर्याप्त है।
– रात 1 बजे से सुबह 4 बजे तक भारी वाणिज्यिक वाहनों और लंबी दूरी की बसों की आवाजाही सीमित की जाए। यह समय चालकों के अनिवार्य विश्राम के लिए निर्धारित किया जा सकता है।
– रात में चार पहिया निजी वाहनों के लिए अधिकतम गति 80 किलोमीटर प्रति घंटा, बसों और भारी वाहनों के लिए अधिकतम 60 किलोमीटर प्रति घंटा होनी चाहिए। स्वचालित कैमरों से सख्त निगरानी और तुरंत चालान किए जाएं।
– यदि कोई वाहन अचानक धीमा हो जाए, रुक जाए या अनियमित तरीके से चले तो तुरंत सूचना मिले और सहायता पहुंचाई जाए। लंबी दूरी चलाने वाले चालकों के लिए यह सुनिश्चित किया जाए कि वे लगातार सीमित घंटे ही ड्राइव कर सकें। टोल प्लाजा पर उनके ड्राइविंग समय का रिकॉर्ड रखा जाए।
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यमुना एक्सप्रेस-वे पर हादसा
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह हो चुके हैं हादसे
सात फरवरी को मथुरा के मांट में यमुना एक्सप्रेस वे पर कंटेनर ने बस से उतर रहे 6 यात्रियों को चपेट में ले लिया। सभी की मौत।