ललितपुर का करीला गांव ऐसा है, जहां दो सगी बहनें हाईस्कूल तक पहुंची हैं। एक ने हाईस्कूल पास कर लिया तो दूसरी इस बार परीक्षा देगी। दोनों चाहती हैं कि शिक्षक बनकर बेटियों में शिक्षा की अलख जगाएं। ललितपुर के तालबेहट तहसील मुख्यालय से आगे बढ़ने पर रेल लाइन से करीब एक किमी दूर करीला गांव है। जंगल और तालाब से घिरी सहरिया जनजाति की इस बस्ती में ज्यादातर पुरुष और महिलाएं खेत जा चुके थे। कुछ युवक मिले, जो पांचवीं के बाद काम धंधे की तलाश में हैं।
करीब 300 परिवार वाली बस्ती में ज्यादातर के पास सरकारी आवास, शौचालय, बिजली, सड़क और घर में सिलेंडर है। राशन भी मिलता है। अगर कुछ नहीं है तो वह शिक्षा। लड़के हों या लड़कियां सभी पांचवी, आठवीं के बाद कमाई में लग जाते हैं। इन्हीं के बीच रहती हैं नेहा और राखी। नेहा ने 65 प्रतिशत अंक के साथ हाईस्कूल पास कर 11वीं में दाखिला लिया है। उसकी बहन राखी हाईस्कूल में है और बहन से ज्यादा अंक लाने के प्रयास में जुटी है। नेहा बताती है कि बस्ती की करीब 25 बच्चियां भी पढ़ाई करें। वह शाम को निशुल्क ट्यूशन पढ़ाना चाहती है, लेकिन बच्चियों के परिवार के लोग राजी नहीं है। फिर भी दो चार आ जाती हैं। नेहा और राखी के पिता चाहते थे कि दोनों खेत में काम करें। पढ़ने में मां ने साथ दिया।
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अन्य बस्तियों में भी शिक्षा का अभाव
करीला की तरह ही जमालपुर की सहरिया बस्ती पहुंचे। यहां करीब 25 परिवार हैं। सरकारी आवास तो बने हैं, लेकिन ज्यादातर घरों में ताले हैं। यहां के लोग मध्य प्रदेश जा चुके हैं। गांव में मिली दुल्ली कहती हैं कि उनकी तीन बेटियां हैं। पांचवी के बाद पढ़ाई छोड़ दी है। कहती है उनके समाज में पढ़ लिख जाने पर शादी ब्याह का संकट हो जाता है।