लखनऊ में विमान कंपनियों की लापरवाही कहें या सरकारी चूक कि जो सरकार का एक आदेश विमान कंपनियों की पूरी सेहत खराब कर गया। नतीजा यह हुआ कि लखनऊ एयरपोर्ट से रोजाना उड़ने वाली 144 उड़ानों में से शुक्रवार को 30 प्रतिशत उड़ाने रद्द रहीं। शुक्रवार को लखनऊ से कुल और जाने वाली 42 फ्लाइटें रद्द रहीं। यात्री और उनके परिजन परेशान रहे लेकिन उससे सरकार को क्या?।
विमानन कंपनियों को क्या? यात्री और उनके परिजन 24-24 घंटे से एयरपोर्ट पर ही डेरा डाले हैं लेकिन चार चार बार रिशेड्यूलिंग के बाद भी उनकी फ्लाइटें रद्द कर दी जा रही हैं। कोई अपने बच्चों से मिलने आया था, तो किसी को मुंबई से होते हुए विदेश जाना है।यात्री समय पर अपने गंतव्य को पहुंच सकें इसलिए बार बार टिकट कैंसिल कराकर नया खरीद रहे हैं।
लेकिन, फिर भी उन्हें तय वक्त फर फ्लाइटें नहीं मिल पा रही हैं। दो दो दिन से एयरपोर्ट पर ही डटे परिवारों का धैर्य जवाब दे गया लिहाजा कई परिवारों ने सड़क मार्ग से ही अपने गंतव्यों की ओर निकल लिए। लेकिन, सबसे बड़ी मुसीबत उनके सामने है जिन्हें विदेश जाना है। मजबूरन वह एयरपोर्ट पर ही डटे रहने को मजबूर हैं।
