वृंदावन के दो बड़े मंदिरों के विवाद में करोड़ों रुपये की स्मार्ट सिटी योजना उलझकर रह गई है। विवाद के निस्तारण के बाद ही कार्यदायी संस्था भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से एनओसी के लिए कदम आगे बढ़ा सकेगी। इसके बाद ही पिछले नौ माह से अधर में लटकी योजना पर कार्य शुरू हो सकेगा।

श्रीरंगजी मंदिर से रंगजी के बड़ा बगीचा तक स्मार्ट सिटी योजना के तहत साढ़े 24 करोड़ रुपये से सौंदर्यीकरण का कार्य प्रस्तावित है। एएसआई द्वारा संरक्षित प्राचीन गोविंद देव मंदिर की 300 मीटर की परिधि में प्रस्तावित क्षेत्र आने पर विभाग ने एएसआई से एनओसी के लिए फाइल बढ़ाई तो क्षेत्र के अधिकार को लेकर दो मंदिर आमने-सामने आ गये। प्राचीन श्री गोविंद देव मंदिर एवं श्रीरंगनाथ मंदिर प्रस्तावित क्षेत्र पर अपना अधिकार बताते हुए न्यायालय पहुंच गये।

एनओसी के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भेजी फाइल भी लौट आई। इससे कार्य लटक गया। योजना पर कार्य कर रही जल निगम की सीएनडीएस शाखा के अधिकारी विवाद के निस्तारण का इंतजार कर रहे हैं। किसी एक मंदिर के द्वारा एएसआई से एनओसी मिलने पर ही योजना पर फिर से कार्य शुरू हो सकेगा। इस योजना के तहत सीएनडीएस ने संरक्षण क्षेत्र की परिधि से अलग पार्किंग स्थल का सीसी व नाले का निर्माण शुरू किया लेकिन विद्युत निगम के ट्रांसफार्मर न हटाये जाने के कारण तीन माह से नाले का कार्य भी अधर में लटका है।

ये होने थे कार्य

साढ़े 24 करोड़ की योजना एक वर्ष पहले स्वीकृत की थी। इसमें पुराने मंदिर, कुंज, आश्रम एवं ऐतिहासिक महत्व वाले भवनों की बाहरी दीवारों और उनके स्थापत्य कला को सुधारकर वृंदावन के पौराणिक स्वरूप निखारना है। सरकारी और निजी भवनों की बाउंड्री वॉल को नया रूप दिया जाएगा। पार्किंग क्षेत्र में कलात्मक टाइल्स लगाई जाएंगी। मुख्य मार्ग का सुदृढ़ीकरण के साथ ही फुटपाथों के किनारे कर्ब स्टोन लगाए जाएंगे। रेड स्टोन की बेंच और पत्थर के सुरक्षा स्तंभ लगाये जाने हैं।

जल निगम के जेई रवि शंकर ने बताया कि श्री रंगजी मंदिर एवं प्राचीन गोविंद देव मंदिर के बीच क्षेत्र के अधिकार को लेकर मामला न्यायालय चला गया है। इसके निस्तारण के बाद एएसआई से एनओसी की फाइल को आगे बढ़ाया जाएगा। उसके बाद ही स्मार्ट सिटी योजना का कार्य शुरू होगा। संभवत: एक माह में विवाद का निस्तारण हो जाएगा।

 



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