बरेली की सेवइयों की मिठास और महक शासन तक पहुंची तो इसे एक जिला एक व्यंजन (ओडीओसी) की सूची में शामिल कर लिया गया। जिले में सालाना करीब पांच करोड़ रुपये का सेवइयों का कारोबार हो रहा है। अब इसमें और बढ़ोतरी की उम्मीद जगी है। 

सेवईं कारोबारियों के मुताबिक, शहर के परसाखेड़ा, नकटिया, हार्टमन में सेवईं के कारखाने लगे हैं। पुराना शहर समेत देहात क्षेत्रों में कुटीर उद्योग की तर्ज पर सीजन के अनुसार सेवईं बनाई जाती है। खासकर रक्षाबंधन, दीपावली, होली, रमजान के मौके पर सेवईं की मांग और खपत बढ़ जाती है। तब कारोबार 50 लाख रुपये प्रतिमाह से ज्यादा हो जाता है। 

सामान्य दिनों में प्रतिमाह करीब 20 लाख रुपये का कारोबार होता है। घरों में किमामी, सूखी मीठी, लच्छा, नवाबी, दूध वाली, फेनी सेवईं तैयार करते हैं। हार्टमन निवासी सेवईं कारखाना संचालक इरफान अली ने बताया कि त्योहारों से माहभर पहले कारखाना चलाते हैं। कारोबारी मुशाहिद हुसैन भी सीजन पर ही काम करते हैं। शेष दिन अन्य पकवान बनाकर बेचते हैं।

ये उत्पाद हैं प्रस्तावित

उपायुक्त उद्योग विकास यादव के मुताबिक, ओडीओसी योजना में सेवईं समेत छोले-भठूरे, चाट, बर्फी भी शामिल किया जाना शासन की ओर से प्रस्तावित है। बर्फी की पहचान पूर्व में आई एक फिल्म से जुड़ी है।



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