संगम की रेती पर गरीबों, बेसहारों को अन्न वस्त्र के दान के साथ ही महिलाएं कहीं समूहों में मां गंगा के गीत गाती रहीं तो कहीं हल्दी-चंदन के टीके लगाने वाले श्रद्धालुओं को घेरे रहे। पुरोहितों की चौकियों पर तिलक-त्रिपुंड लगता रहा। सुरक्षा कर्मियों की चौकसी के बीच जल पुलिस रिवर बैरिकेडिंग के अंदर ही स्नान करने के लिए सचेत करती रही।
श्रद्धा और विश्वास का दिखा दम ठंड पर भारी पड़ी आस्था की डुबकी
गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर शनिवार को भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। 44 दिवसीय माघ मेले के पहले दिन पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर श्रद्धालु उमड़ पड़े। देश के कोने-कोने से आए संत, कल्पवासी और श्रद्धालु संगम की ओर बढ़ते नजर आए। शरीर पर शॉल, अलग-अलग वेशभूषा और चेहरे पर श्रद्धा की चमक आस्था की गवाही दे रही थी।
कड़ाके की सर्दी भी श्रद्धालुओं के उत्साह को डिगा नहीं सकी। परिवार, गांव वालों और रिश्तेदारों के साथ श्रद्धालु पैदल ही संगम की ओर बढ़ते रहे। जैसे ही श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई, चेहरे पर थकान की जगह सुकून और आनंद साफ झलक उठा।
गुजरात के बलसार के प्रितेश कुमार अपनी पत्नी पूजा पटेल, सास मीना बेन और ससुर नंटू भाई के साथ संगम स्नान के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि पैदल चलने से थकान जरूर हुई लेकिन संगम में स्नान करते ही सारी थकान दूर हो गई।




