सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द दिया, जिसमें कासगंज की एक किशोरी के मामले में हाईकोर्ट ने दो आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास के आरोपों को कम गंभीर अपराध में बदल दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने महिला के निजी अंग पकड़ने, नाड़ा खोलने और उसे नाले के नीचे घसीटने की हरकतों को दुष्कर्म का प्रयास नहीं, बल्कि तैयारी माना था, जो कि गलत था। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों आरोपियों के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की ओर से तय दुष्कर्म के प्रयास के आरोपों को बहाल कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के हाईकोर्ट का फैसला पलटने पर कासगंज निवासी पीड़िता की मां ने संतोष जाहिर किया। किशोरी की मां ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से हमें न्याय मिला है। सुप्रीम कोर्ट का बहुत-बहुत धन्यवाद है। हाईकोर्ट से जब हमारा केस कमजोर हो गया था तो हम अकेले पड़ गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने ही मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए हमें सहारा दिया। हमें दोबारा न्याय का भरोसा दिलाया। अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाईकोर्ट का फैसला पलटने पर हमें संतोष महसूस हो रहा है। अब बिटिया को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। हम उसे न्याय दिलाकर ही दम लेंगे।