राजधानी लखनऊ के सात मार्गों पर बनने वाले प्रवेश द्वारों के लिए रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए प्रदेश सरकार के बजट में 30 करोड़ रुपये रखे गए हैं। मुख्यमंत्री ने 30 जनवरी को द्वार बनाए जाने की घोषणा की थी। द्वार बनने से राजधानी में प्रवेश करते ही प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत के दर्शन होंगे। धर्म-शौर्य के प्रतीक इन प्रवेश द्वारों पर उत्तर प्रदेश का राजकीय चिह्न भी होगा। ये द्वार लखनऊ से प्रयागराज, वाराणसी, अयोध्या, नैमिषारण्य, हस्तिनापुर, मथुरा और झांसी की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर बनाए जाएंगे। इनकी डिजाइन में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला, शिल्पकला, सांस्कृतिक प्रतीक होंगे। स्तंभ, म्यूरल, फव्वारे, प्रकाश व्यवस्था से प्रवेश द्वारों को सौंदर्यपूर्ण बनाया जाएगा।

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संगम, नंदी, सूर्य, व्यास, धर्म, कृष्ण, शौर्य होंगे नाम


मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत प्रयागराज मार्ग (रायबरेली रोड) पर त्रिवेणी संगम और महाकुंभ परंपरा को दशनि वाला संगम द्वार, वाराणसी मार्ग (सुल्तानपुर रोड) पर श्री काशी विश्वनाथ धाम को दर्शाने वाला नंदी द्वार, अयोध्या मार्ग (बाराबंकी रोड) पर भगवान श्रीराम और सूर्यवंश की परंपरा पर आधारित सूर्य द्वार होना चाहिए। नैमिषारण्य मार्ग (सीतापुर रोड) पर व्यास द्वार, हस्तिनापुर मार्ग (हरदोई रोड) पर धर्म द्वार, मथुरा मार्ग (आगरा रोड) पर कृष्ण द्वार तथा झांसी मार्ग (उन्नाव रोड) पर वीरता और शौर्य का प्रतीक शौर्य द्वार स्थापित बनाया जाएगा।



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