
मैथिली शरण गुप्त का घर
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
{“_id”:”6976fc457b59322c440db801″,”slug”:”national-poets-maithili-sharan-gupt-village-still-missing-from-literary-tourism-map-2026-01-26″,”type”:”feature-story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”UP: साहित्यिक पर्यटन के नक्शे पर दर्ज नहीं राष्ट्रकवि का गांव, पूर्व केंद्रीय मंत्री निशंक ने की थी ये घोषणा”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और राज्य”,”slug”:”city-and-states”}}

मैथिली शरण गुप्त का घर
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त की जन्मभूमि। साकेत, यशोधरा जैसी काव्य रचनाओं की साधना स्थली। हिंदी साहित्य जगत में बड़ा नाम गौरवशाली सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत, लेकिन चिरगांव को कवि गांव बनाने का सपना अूधरा है।
डिजिटल युग में हजारों किताबें उनकी हवेली के बंद कमरों में धूल फांक रही हैं। पांडुलिपियों समेत कई स्मृतियां धूमिल हो रही हैं। हवेली को लेखकों का इंतजार है।
आजादी से पहले यहां साहित्य सदन नामक जिस प्रेस से राष्ट्रभावना बहती थी, उसका नामोनिशान तक नहीं है। यह वही छापाखाना था, जहां से खड़ी बोली में स्वाधीनता का स्वर जन-जन तक पहुंचा लेकिन दशकों पहले ये मशीनें खामोश हो गईं।
अब उनकी किताबें दिल्ली में छपती हैं। कभी यह देश की मुक्ति में योगदान देने वाले लेखकों के विचारों का केंद्र रहा, लेकिन अब कोई लेखक यहां रहकर साहित्य सृजन नहीं करता।