राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग और राज्य सरकार से मांग की है कि अपने घर के आंशिक हिस्से में दुकान करने वालों को लगतार राहत दी जाए। 

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश में लगभग 15 से 20 लाख घरेलू विद्युत उपभोक्ता ऐसे हैं, जो अपनी आजीविका चलाने के लिए अपने घर के एक हिस्से में छोटे व्यवसाय (जैसे- सिलाई, किराना, मोबाइल रिपेयरिंग, आदि) संचालित करते हैं।  विद्युत विभाग ऐसे उपभोक्ताओं के विरुद्ध अभियान चलाकर उनके कनेक्शन को वाणिज्यिक श्रेणी में परिवर्तित कर रहा है।

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कई स्थानों पर बिजली चोरी के मुकदमे भी दर्ज किए जा रहे हैं। यह गलत है। ग्रामीण इलाके में यह कार्य करने वाले लोग किसी तरह से अपनी आजीविका चला रहे हैं। घर में एक कनेक्शन पहले से मौजूद है तो उन्हें वाणिज्यिक श्रेणी में न बदला जाए क्योंकि वे सीमित संसाधनों में अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।

वर्ष 2019 में उपभोक्ता परिषद द्वारा इस संबंध में एक प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया था, जिसमें यह मांग की गई थी कि ऐसे उपभोक्ताओं पर कठोर राजस्व निर्धारण न करते हुए नियमों में शिथिलता प्रदान की जाए। 

इस पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा बिजली कंपनियों से रिपोर्ट मांगी गई थी, जिसमें पावर कॉर्पोरेशन की ओर से यह सुझाव दिया गया था कि दो किलोवाट तक और 200 यूनिट तक खपत वाले ग्रामीण उपभोक्ताओं को कुछ शर्तों के साथ घरेलू श्रेणी में रखा जा सकता है। फिर भी इस विषय पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। परिषद अध्यक्ष ने मांग की कि इस मामले में त्वरित निर्णय लिया जाए।  इससे न केवल लाखों परिवारों को राहत मिलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।



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