मथुरा के पास गोवर्धन पर्वत और डीग के बीच बहाज में 800 ईसा पूर्व के सिक्कों का ऐसा खजाना मिला है जो सिक्कों के प्रचलन से जुड़े इतिहास को बदल देगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने दो चरणों में बहाज के वज्रनाभ का खेड़ा टीले पर उत्खनन किया, जिसमें 800 ईसा पूर्व से गुप्त काल तक के 220 सिक्के और 47 कौड़ियां मिलीं। इनकी वैज्ञानिक जांच और रासायनिक सफाई के बाद सूरज, तीन आर्च वाली पहाड़ी, जानवर खासकर शेर की आकृतियां मिली हैं।

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एएसआई के जयपुर सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. विनय कुमार गुप्ता के निर्देशन में बीते साल से उत्खनन शुरू किया गया। दो चरणों में यहां चांदी के सात आहत सिक्के (सिल्वर पंच) मिले हैं, जो आयताकार हैं और इनका वजन 3 से 3.3 ग्राम है। यह मौर्य काल से पहले का सिक्का है जो बेहद घिसा हुआ मिला। तांबे के पंच वाले 18 सिक्के मिले, जिनमें 14 एक साथ पाए गए। इन पर शेर, भेड़िया या कुत्ता बना हुआ है। तांबे के 6 ढलवां सिक्के मिले हैं, जिन पर हाथी और चैत्यवृक्ष जैसे चिह्न हैं। उत्खनन में बहुत घिसे हुए सिक्के मिले। अध्ययन के मुताबिक यह कम से कम 200 साल तक चलन में रहे होंगे। इस आधार पर इन्हें ईसा पूर्व 8वीं शताब्दी का माना जा रहा है।

 



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