हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कारोबारी निकांत जैन के खिलाफ अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप में चल रहे पूरे आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है। राजधानी के गोमतीनगर थाने से सबंधित यह आपराधिक मामला प्रस्तावित सोलर पावर परियोजना से जुड़ा था। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश निकांत जैन की याचिका पर दिया। निकांत जैन को अभिषेक प्रकाश का करीबी माना जाता है।
कोर्ट ने फैसले में कहा है कि मामले में भारतीय न्याय संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पहली नजर में कोई अपराध बनता ही नहीं है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने 15 मई 2025 को दाखिल चार्जशीट तथा 17 मई 2025 के तलबी आदेश को भी निरस्त कर दिया।
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अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता ने स्वयं स्वीकार किया है कि शिकायत गलतफहमी के आधार पर दर्ज कराई थी। मामले की एफआईआर 20 मार्च 2025 को गोमती नगर थाने में दर्ज की गई थी जो एक कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा सीएम को भेजी गई शिकायत पर आधारित थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सोलर मैन्युफैक्चरिंग परियोजना की मंजूरी के लिए परियोजना लागत के 5 प्रतिशत की रिश्वत मांगी गई। निकांत की ओर से दलील गई दी कि आरोप अस्पष्ट, साक्ष्य विहीन और कारोबारी प्रतिद्वंद्विता व प्रशासनिक भ्रम का नतीजा हैं। यह भी तर्क दिया गया कि न तो कोई धनराशि दी गई न कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति सौंपी गई।
यह भी कहा गया कि विवेचना के दौरान नक्शा-नजरी नहीं बनाया गया और कथित एक करोड़ रुपये नकद की कोई बरामदगी भी नहीं हुई। कोर्ट ने भी पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि अभियुक्त ने किसी लोक सेवक को अनुचित लाभ देने की पेशकश की हो।
