रामबाग से टेढ़ी बगिया तक डिवाइडर कई जगह टूटे हैं। रात में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था न होने से लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं। आसपास कई मोहल्ले और काॅलोनियों के रास्ते हैं। इनके मोड़ या कट पर बोर्ड या संकेतक कई जगह नहीं लगे हैं। टेढ़ी बगिया से आगे भी यही स्थिति है। डिवाइडर नहीं बना है।

कई स्थानों पर लेन बताने के लिए लगी सफेद पट्टी भी गायब हो चुकी है। लाइट भी कुछ ही जगह लगी है। सिंगल रास्ता होने से कोहरे में वाहन दिखाई नहीं देते हैं। हमेशा हादसों का खतरा बना रहता है। ज्यादा खतरा खंदौली पड़ाव चाैराहे, मलूपुर चौराहे, उजरई नंदलालपुर कट पर हैं। कहीं भी संकेतक और बोर्ड नहीं लगे हैं।

हाईवे पड़ाव चौराहा दाऊजी मार्ग, मुढ़ी मार्ग, एत्मादपुर मार्ग, सैमरा-आंवलखेड़ा मार्ग से जुड़ा हुआ है। यहां फाॅग लाइट भी नहीं हैं। उजरई और अजीतगढ़ पर सड़क किनारे तालाब के सहारे लोहे के डिवाइडर तो लगा दिए गए लेकिन कोई रिफ्लेक्टर नहीं लगाया गया। खंदौली के पड़ाव चौराहे, उजरई, अजीतगढ़, नंदलालपुर, पोइया और मलूपुर तिराहे पर कई बार हादसे हो चुके हैं।

पशुओं से जा सकती है जान

ग्रामीणों ने बताया कि एनएच-509 पर गोवंश आ जाते हैं। कई बार सड़क पर ही बैठ जाते हैं। इस कारण आम दिनों में भी हादसे हो जाते हैं। कोहरे के समय यह खतरा बढ़ जाता है। हाईवे के दोनों तरफ तार लगे होने चाहिए। लोगों का आरोप है कि कागजों में ही फाॅग लाइट लग रही है। खंदाैली में टोल वसूल रही कंपनी का 15 वर्ष अनुबंध है। रामबाग से टोल प्लाजा तक कहीं भी सीसीटीवी कैमरे भी नहीं हैं।

कराई गई है व्यवस्थाएं

एनएचएआई टोल प्लाजा प्रोजेक्ट मैनेजर विनय वर्मा ने बताया कि नवंबर माह में एक महीने में कुल 10 हादसे हुए। इनमें 8 लोग घायल हुए और 2 की मौत हो गई। खंदाैली, हाथरस और अलीगढ़ क्षेत्र में 13 ब्लैक स्पाॅट हैं। इन पर दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्र के बोर्ड लगाए गए हैं। फाॅग लाइट भी लगा दी गई है। कई जगह काम चल रहा है। वरोस टोल प्लाजा पर एक एंबुलेंस रहती है। एक क्रेन की भी व्यवस्था है। 

 



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