इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस मुठभेड़ों में अभियुक्तों के पैरों में गोली मारने की बढ़ती घटनाओं पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी आरोपी को सजा देने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है, पुलिस के पास नहीं। कोर्ट ने इसे कानून के शासन और सांविधानिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने राजू उर्फ राजकुमार की जमानत अर्जी पर दिया है।

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अदालत ने राजू को सशर्त जमानत दे दी है। कोर्ट ने दिशा-निर्देशों की अनदेखी पर अवमानना की कार्यवाही की चेतावनी भी दी है।मिर्जापुर निवासी राजू पर कोतवाली देहात थाने में विभिन्न आरोपों में प्राथमिकी दर्ज है। उसने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दायर की थी। याची की अधिवक्ता कुसुम मिश्रा ने दलील दी कि याची को झूठे मामले में फंसाया गया। कथित पुलिस मुठभेड़ में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य सचिव (गृह) व डीजीपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये तलब कर जवाब मांगा था। शुक्रवार को दोनों अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हाजिर हुए और भरोसा दिलाया कि मुठभेड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के लिए सर्कुलर जारी किए गए हैं। इनका पालन न करने पर कार्रवाई की जाएगी।



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