यूपी सरकार ने भर्तियों में आरक्षित पदों को लेकर समय-समय पर उठने वाले विवादों को पूरी तरह से खत्म करने की तैयारी की है। अब आरक्षित पदों की संख्या तय होने के बाद ही भर्तियां होंगी। संबंधित विभागों को रिक्तियों का प्रस्ताव भेजने से पहले एससी-एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस के पदों को स्पष्ट करना होगा। जरूरी होने पर आयोगों के साथ विभागों को बैठक भी करना होगा ताकि भर्तियों में पेंच फंसने की आशंका खत्म हो।
शासन की मंशा है कि भर्ती विज्ञापन निकालने से पहले पदों की गणना स्पष्ट रहे। इसमें देखा जाएगा कि आरक्षण के मुताबिक पदों का बंटवारा सही है या नहीं। इस संबंध में शासन ने सभी आयोगों को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि राज्य के अधीन सेवाओं में ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्थाओं का मानक के अनुरूप पालन किया जाए। उप्र लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, जनजातियों एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम-2020 में दी गई व्यवस्था का हर हाल में पालन सुनिश्चित करें।
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आयोगों के जरिये होती हैं भर्तियां
प्रदेश में भर्तियों के लिए उप्र लोक सेवा आयोग, उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, उप्र विद्युत सेवा आयोग, उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग, उप्र पुलिस भर्ती बोर्ड और उप्र सहकारी संस्थागत सेवा मंडल बनाया है। सबसे अधिक भर्तियां लोक सेवा और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग करता है। पर, पिछले कुछ भर्ती विज्ञापनों को लेकर आपत्तियां मिलीं कि रिक्तियों में ओबीसी के लिए कम पद तय हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए ही सरकार ने ये दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
