पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक गिरोह मृत्युशैया पर पड़े लोगों को चिह्नित कर विभिन्न कंपनियों से उनका जीवन बीमा कराता है। कई मामलों में तो मृत व्यक्तियों के नाम पर भी पॉलिसी ली गई है। जांचकर्ता सत्यापन के लिए जाते हैं तो गिरोह के सदस्य धमकाते हैं। पुलिस जांच कर दोषियों को सजा दिलाने में सहयोग नहीं कर रही है। यह दलील इलाहाबाद हाईकोर्ट में एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड के वकील ने दी।

 

न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ बिजनौर निवासी नवाब अली उर्फ नवाबुद्दीन की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। महिला ने आरोप लगाया था कि पति की मौत के बाद मिली बीमा राशि से याची ने धोखाधड़ी कर 4.8 लाख रुपये निकाले लिए। इस पर याची के वकील ने दलील दी कि पति की मृत्यु के बाद शिकायतकर्ता को दी गई 9,60,000 रुपये की परिपक्वता राशि में से चार लाख 80 हजार रुपये लिए गए हैं। ये रुपये बीमा राशि प्राप्त करने के खर्च के रूप में सहमति से लिए गए थे।

 

कोर्ट ने बीमा के बदले में ली गई राशि के बारे में ब्रांच मैनेजर को बुलाया था। कंपनी के वकील ने गिरोह की बात कोर्ट से बताई। इस पर कोर्ट ने विवेचनाधिकारी को केस डायरी और संबंधित रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। साथ ही सरकारी वकील को निर्देश दिया है कि जानकारी दें कि इस खेल में बीमा कंपनी के किसी कर्मचारी या जांचकर्ता की मिलीभगत की जांच की गई या नहीं। अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी।



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