इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विभाग निलंबन के बाद तय समय में आरोप पत्र जारी करने या कार्यवाही आगे बढ़ाने में विफल रहता है तो कर्मचारी का निलंबन आदेश स्वतः रद्द माना जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने अमित सिंह की याचिका पर दिया है। अमित ने 12 दिसंबर 2025 को जारी अपने निलंबन आदेश को चुनौती दी थी। निलंबन की अवधि के दौरान उन्हें महराजगंज के निठौरा राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय से संबद्ध किया गया था।

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अधिवक्ता ने दलील दी कि याची ने संबद्ध स्थान पर कार्यभार ग्रहण कर लिया है। विभाग जानबूझकर कार्यवाही में देरी कर रहा है। इस पर राज्य सरकार के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। जल्द उसके खिलाफ आरोप पत्र जारी किया जाएगा।

कोर्ट ने निलंबन आदेश में हस्तक्षेप करने से तो इन्कार कर दिया पर विभाग की ढुलमुल कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया है। निर्देश दिया है कि विभाग इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के चार सप्ताह में यह तय करे कि उसे कर्मचारी के खिलाफ आरोप पत्र जारी करना है या नहीं। इस अवधि में कोई निर्णय नहीं लिया गया या कार्यवाही शुरू नहीं की गई तो निलंबन आदेश स्वतः निरस्त हो जाएगा और कर्मचारी बहाल माना जाएगा। 



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