इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रदेश की जिला अदालतों में लंबित आपराधिक मामलों में दशकों तक आरोप तय नहीं होने से नाराज है। इससे भी ज्यादा उन जिला जजों से खफा है, जिन्होंने दिसंबर में लंबित मामलों की तलब की गई जानकारी आधी-अधूरी दी या फिर अपने अधीनस्थों के जरिये पेश कर खानापूरी की। कोर्ट ने इसे न्यायिक अनुशासनहीनता मानते हुए ऐसे जिला जजों को विस्तृत जानकारी देने के लिए एक हफ्ते की आखिरी मोहलत दी है।

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इस तल्ख टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने उन जिला जजों को आगरा के जिला जज से सीख लेने की नसीहत दी है, जिन्हें रिपोर्ट बनाने में दिक्कत महसूस हो रही है। मामले में 27 फरवरी को सुनवाई होगी। कोर्ट प्रयागराज की याची उर्मिला मिश्रा की याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

कहा कि दशकों से आरोप तय न होना न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन है। यह सीधे तौर पर कानून के शासन को प्रभावित करता है। इससे पहले कोर्ट ने 16 दिसंबर को प्रदेश के सभी जिला जजों से रिपोर्ट तलब कर पूछा था कि 2004 से 2024 के बीच ऐसे कितने आरोप पत्र दाखिल हुए हैं, जिनमें अब तक आरोप तय नहीं हो सके।



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