इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद पैनल अधिवक्ता के पद पर नवीनीकरण की मांग वाली याचिका रद्द कर दी। हालांकि, कोर्ट ने याची को सेवानिवृत्ति आयु निर्धारित करने वाले शासनादेश को चुनौती देने की छूट दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने आजमगढ़ की फूलपुर तहसील में राज्य सरकार के पैनल अधिवक्ता (राजस्व) के रूप में तैनात रहे अधिवक्ता धीरेंद्र कुमार त्रिपाठी की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। आजमगढ़ के डीएम ने पैनल अधिवक्ता की नियुक्ति के नवीनीकरण की मांग को मानने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि याची ने 60 वर्ष की आयु पूरी कर ली है।
याची ने डीएम के इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याची के अधिवक्ता अरविंद कुमार उपाध्याय ने दलील दी कि यूपी राजस्व संहिता की धारा-72 व 74 में पैनल अधिवक्ता के नवीनीकरण में आयु की बाधा नहीं है। यही नहीं, नियुक्ति के लिए 2018 में जारी विज्ञापन में भी आयु का प्रतिबंध नहीं था। इसी आधार पर याची का वर्ष 2022 में नवीनीकरण हुआ था। 2025 में नवीनीकरण की अर्जी आयु के आधार पर खारिज की जानी राजस्व संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन है।
वहीं, राज्य सरकार के अधिवक्ता ने 29 जुलाई 2022 के शासनादेश का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि सरकार ने शासकीय अधिवक्ता की सेवानिवृत्ति आयु 60 साल तय की है। इसी आधार पर याची के नवीनीकरण से इन्कार किया गया है। कोर्ट ने पाया कि याची ने 29 जुलाई के शासनादेश को चुनौती नहीं दी है। लिहाजा, कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
