जीएसटी चोरी में सिर्फ निजी फर्मे ही नहीं लिप्त हैं, बल्कि औद्योगिक विकास प्राधिकरण और सरकारी संस्थाएं भी जीएसटी का भुगतान नहीं कर रही हैं। इसे देखते हुए शासन ने विशेष रूप से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा की बैलेंस शीट के सघन अध्ययन के निर्देश दिए हैं। निर्माण और विकास कार्यों के लिए सरकार से बजट लेने वाली सरकारी संस्थाओं के खर्च के प्रपत्र भी जांचने के निर्देश दिए गए हैं। संस्थाओं से जुड़े ठेकेदारों और फर्मों की जांच के निर्देश प्रमुख सचिव राज्य कर ने सभी अपर आयुक्तों को दिए हैं।

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प्रदेश के कुल राजस्व में राज्य कर की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी है। चालू वित्तीय वर्ष में राज्य कर से 1.75 लाख करोड़ का राजस्व हासिल करने का लक्ष्य है। इसे पूरा करने के लिए प्रमुख सचिव राज्य कर आयुक्तों को सरकारी एम. देवराज ने अपर संस्थाओं, उनसे जुड़े ठेकेदारों और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के जरिये कराए जा रहे निर्माण कार्यों के बजट की समीक्षा के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन कामों में बड़े पैमाने पर जीएसटी का भुगतान नहीं किए जाने किए जाने की सूचना है। इसे देखते हुए सरकार हर जिले में हो रहे निर्माण कार्यों की सूची तैयार करा रही है।

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इसी आधार पर जीएसटी की बकाया वसूली का नोटिस भेजा जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग पर भी जीएसटी की देनदारी की जांच हो रही है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा द्वारा दी जाने वाली विभिन्न तरह की सेवाओं पर जीएसटी बकाया है। ये प्राधिकरण कई तरह की फीस भी लेते हैं जिन पर जीएसटी लागू है। इसकी वसूली के लिए प्राधिकरणों की बैलेंस शीट का डाटा एनालिसिस किया।



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