विधानसभा चुनाव 2027 में भाजपा के मौजूदा विधायकों की दावेदारी पर संकट आ सकता है। टिकट बांटने से पहले सभी विधायकों को जनता की कसौटी पर कसा जाएगा। विधायकों की लोगों के बीच छवि परखने का काम शुरू भी कर दिया गया है।

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दरअसल, सरकार और भाजपा चुनावी मोड में जाने से पहले अपने विधायकों के बारे में पूरा ब्योरा जुटाना चाहती है। इसलिए उनके कामकाज का ऑडिट कराया जा रहा है ताकि पता लगाया जा सके कि कौन विधायक जनता के बीच कितना सॉलिड है।

भाजपा प्रदेश में लगातार दो बार सरकार बनाने के बाद अब हैट्रिक की रणनीति बना रही है। ऐसे में पार्टी टिकट बांटने में कोई गलती नहीं करना चाहती। सूत्रों के मुताबिक, विधायकों का ऑडिट कराने की जिम्मा सरकार को सौंपा गया है। सरकार ने कुछ एजेंसियों को काम पर लगा दिया है। एजेंसियों ने गोपनीय तरीके से काम शुरू भी कर दिया है।

विधायकों के कामकाज और जनता के बीच छवि का ऑडिट कराने के साथ ही सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों के सामाजिक व राजनीतिक समीकरणों के आधार पर सर्वे कराने का भी फैसला लिया गया है। विधानसभावार सर्वे करके एक डाटा तैयार किया जाएगा। साफ है कि विधानसभा चुनाव 2027 में विधायकों को टिकट पाने के लिए अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ेगा।

तीन श्रेणियों में होगा आकलन

सर्वे में विधायकों की छवि का आकलन ए, बी और सी तीन श्रेणियों में किया जाएगा। ऑडिट के बाद विधायकों को श्रेणीबद्ध करते हुए अंक दिए जाएंगे। सर्वाधिक अंक पाने वाले विधायक को ए श्रेणी में रखा जएगा। इसी प्रकार अंक के आधार पर बी और सी श्रेणी में रखा जाएगा। सरकार के स्तर से पूरा डाटा तैयार करके पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को रिपोर्ट भेजी जाएगी।



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