डीबीएफओटी मॉडल पर विकसित होंगे प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के अंतर्गत डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (डीबीएफओटी) मॉडल पर प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड्स के विकास हेतु वर्ष 2026 की योजना को मंजूरी दे दी है। मंत्रिपरिषद के इस निर्णय का उद्देश्य राज्य में औद्योगिकीकरण की गति तेज करना, विनिर्माण क्षमता का विस्तार करना तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को शीघ्र उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार अवसंरचना उपलब्ध कराना है।

राज्य सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) के लक्ष्य तक पहुंचाने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान “लीज एवं बिल्ड” मॉडल में उद्यमियों को भूमि प्राप्त करने के बाद भवन, आंतरिक सड़कें, ड्रेनेज, एसटीपी/ईटीपी तथा अग्निशमन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भारी निवेश करना पड़ता है, जिससे उत्पादन शुरू होने में 18 से 36 महीने तक का समय लग जाता है। नई योजना के तहत इन चुनौतियों को कम करने के लिए पहले से विकसित औद्योगिक शेड उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उद्योगों की स्थापना प्रक्रिया तेज होगी।

इस योजना का प्रमुख उद्देश्य पूर्व-निर्मित तथा आवश्यक उपयोगिताओं से युक्त औद्योगिक शेड्स के माध्यम से भूमि-आधारित औद्योगिक विकास को अधिक तेज, कुशल और रोजगारोन्मुख बनाना है। इसके साथ ही राज्य सरकार भूमि का स्वामित्व अपने पास रखते हुए निजी निवेश से अवसंरचना विकसित कराएगी। इससे उद्योगों की प्रारंभिक लागत कम होगी और उत्पादन शीघ्र प्रारंभ किया जा सकेगा।

योजना के तहत विकसित शेड्स में प्रमुख रूप से मेटल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी कंपोनेंट्स, ऑटो सहायक उद्योग, टेक्सटाइल/गारमेंट, फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक एवं पैकेजिंग, डिफेंस एयरोस्पेस तथा ईएसडीएम जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। आवश्यकता के अनुसार औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र-विशिष्ट आरक्षण तथा सीमित सहायक सुविधाएं भी प्रदान कर सकेगा।

डीबीएफओटी मॉडल के अंतर्गत निजी डेवलपर डिजाइन, वित्त, निर्माण, संचालन तथा हस्तांतरण का कार्य करेगा। इस योजना में कन्सेशन अवधि 45 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसे अधिकतम 15 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। पायलट परियोजनाओं के लिए 15 से 20 एकड़ भूमि को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि न्यूनतम भूमि आकार 10 एकड़ प्रस्तावित है। परियोजना की अवधि पूर्ण होने अथवा समाप्ति की स्थिति में सभी परिसंपत्तियां उपयोग योग्य स्थिति में औद्योगिक विकास प्राधिकरण को हस्तांतरित कर दी जाएंगी, जबकि भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा।

योजना के अंतर्गत न्यूनतम विकास दायित्व (एमडीओ) निर्धारित किए गए हैं, ताकि भूमि का अनावश्यक संचयन (होर्डिंग) रोका जा सके तथा समयबद्ध विकास सुनिश्चित किया जा सके। वित्तीय दृष्टि से भी योजना को राजकोषीय अनुशासन (फिस्कल प्रूडेंस) के अनुरूप तैयार किया गया है।

इस योजना के अंतर्गत किसी प्रकार की बजटीय सहायता, व्यवहार्यता अंतर अनुदान (वीजीएफ) अथवा राज्य सरकार की गारंटी प्रदान नहीं की जाएगी तथा राज्य पर कोई आकस्मिक देयता भी नहीं होगी। औद्योगिक विकास प्राधिकरण को एकमुश्त प्रीमियम, वार्षिक शुल्क तथा राजस्व साझेदारी (रेवेन्यू शेयर) के माध्यम से आय प्राप्त होगी।

सरकार का मानना है कि इस निर्णय से औद्योगिक भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा, निवेश आकर्षित होगा, उत्पादन गतिविधियां तेज होंगी तथा बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।



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