
UP Chunav Result 2024
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लोकसभा चुनाव में काफी हद तक दलित मतदाताओं का रुझान निर्णायक रहा। उत्तर प्रदेश में जितनी बसपा और भाजपा घटी, ठीक उतने ही फायदे में सपा और कांग्रेस रहीं। इसके पीछे दलित मतदाताओं का बड़ा हाथ माना जा रहा है।
जनसभाओं में राहुल गांधी के संविधान की किताब दिखाने और 69 हजार शिक्षक भर्ती में ओबीसी आरक्षण के मामले ने जहां मनोवैज्ञानिक प्रभाव डाला, वहीं आम जिंदगी की दुश्वारियों ने भी अहम रोल निभाया।
इस चुनाव में दलितों का वोटिंग पैटर्न क्या रहा, इस सवाल पर फिलहाल विशेषज्ञों का कहना है कि मतदान बाद का अध्ययन अभी चल रहा है और नतीजे आने में वक्त लगेगा। लेकिन, इतना जरूर कहा जा सकता है कि दलित मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा विकल्प की तलाश में था और अलग-अलग राज्यों में उसका व्यवहार अलग-अलग रहा।
यूपी में उसका झुकाव इंडिया गठबंधन की ओर रहा। दलित मतदाताओं का सपा प्रत्याशियों की ओर जाने में कांग्रेस का साथ होना भी अहम फैक्टर माना जा रहा है। सीएसडीएस के अनुसार, देश में वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा को 24 प्रतिशत और 2019 में 34 प्रतिशत दलित वोट भाजपा को मिले।
