
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय।
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नीट के मुद्दे को लेकर शुक्रवार को प्रदेशभर में सड़क पर उतरी कांग्रेस ने अपना नया रूप दिखाया है। संघर्ष का रास्ता अख्तियार कर वह नई सियासी पारी के लिए बेताब भी दिखी। इस आंदोलन के बहाने कांग्रेस अरसे बाद विपक्ष की मुख्य भूमिका में भी नजर आई।
प्रदेश में कांग्रेस के सिर्फ दो विधायक हैं। लोकसभा चुनाव में उसे छह सांसद मिल गए हैं। कांग्रेस के पास जुझारू पहचान वाले अजय राय जैसे प्रदेश अध्यक्ष हैं तो अजय राय की टीम में उपाध्यक्ष दिनेश सिंह, संगठन महासचिव के रूप में अनिल यादव, पिछड़ा वर्ग के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव, अल्पसंख्यक विभाग के शाहनवाज आलम, सेवादल के प्रमोद पांडेय सहित तमाम युवा और वैचारिक आंदोलन से निकले नेता हैं। इन सभी की एकजुटता शुक्रवार को साफ दिखी।
नीट को लेकर विधानसभा घेराव के दौरान तमाम ऐसे भी कांग्रेसी दिखे, जो कई साल से आंदोलनों से दूर रहे हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं भी आंदोलन में शामिल हुईं। कांग्रेस जनता के लिए सड़क पर संघर्ष के लिए तैयार है। सामाजिक चेतना फाउंडेशन से जुड़े सेवानिवृत्ति न्यायाधीश बीडी नकवी कहते हैं कि शुक्रवार को हुआ आंदोलन कांग्रेस की तरफ कदम बढ़ाने वालों को भी भरोसा देगा।
पिछले कुछ समय से कांग्रेस से विभिन्न दलों के लोग जुड़ रहे हैं। यह सिलसिला तेज होगी, जो कांग्रेस की ताकत को बढाएगा। वह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में लंबे समय से युवाओं के हक को लेकर सड़क पर संघर्ष नहीं हो रहा है। नीट के आंदोलन में ज्यादातर युवा नेता थे। यह भी एक नए तरीके का संदेश दे गया है।
