
त्वचा की चमक बनाए रखेगी यह हर्बल क्रीम।
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त्वचा को चमकदार बनाए रखने की हर किसी की हसरत होती है। झुर्रियां मिटाने के लिए बोटॉक्स, स्टेरॉयड और स्किन टोनर सीरम तक का इस्तेमाल किया जाता है। पर, इन प्रक्रियाओं के अपने खतरे भी हैं। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग के डॉ. अमित कुमार वर्मा का दावा है कि उन्होंने ऐसी एंटी एजिंग हर्बल क्रीम तैयार की है, जो बिना कोई नुकसान पहुंचाए त्वचा की चमक को बरकरार रखेगी। उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने उनके फॉर्मूले को मान्यता भी दे दी है।
उम्र ढलने के साथ ही चेहरे पर झुर्रियां आनी शुरू हो जाती हैं। उसकी चमक-दमक फीकी पड़ने लगती है। डॉ. अमित बताते हैं कि उन्होंने तुलसी, कपूर के तेल और एलोवेरा के साथ ही कुछ जड़ी-बूटियों के तेल का इस्तेमाल कर खास क्रीम तैयार की है। इस क्रीम के एंटी ऑक्सीडेंट गुण त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने के साथ ही कोलेजेन फाइबर को रिपेयर करने में मददगार होते हैं। (संवाद)
डॉ. अमित बताते हैं कि बाजार में ज्यादातर कॉस्मेटिक क्रीम में रसायनों का इस्तेमाल होता है। झुर्रियां मिटाने के लिए और भी कई तरह की प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। पर, इनके दुष्परिणाम भी सामने आते रहते हैं। कॉस्मेटिक क्रीम में खतरनाक रसायनों के प्रयोग से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से त्वचा में फंगल इंफेक्शन आम समस्या हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने तो इसकी गंभीरता को समझते हुए फंगल इंफेक्शन को साइलेंट पैंडेमिक तक कहा है। ऐसे में शत प्रतिशत हर्बल और नुकसान रहित क्रीम का ईजाद करना काफी चुनौतीपूर्ण रहा।
बरसों हुआ अध्ययन
बरसों के शोध व आयुर्वेद की प्राचीन पुस्तकों व कीमिया के अध्ययन से मिस्टिक इसेंशियल ऑयल का सही अनुपात तैयार किया गया। वनस्पतियों के अर्क से थाइमॉल नामक रसायन तैयार किया गया। थाइमॉल त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया को तो खत्म करता है पर गुड बैक्टीरिया को बचाए रखता है। साथ ही त्वचा के पीएच लेवल को मेंटेन करता है, जिससे उसकी कांति प्राकृतिक रूप से बरकरार रहती है। बेस के लिए एलोवेरा का इस्तेमाल किया है।
डॉ. अमित का कहना है कि क्रीम का जानवरों पर परीक्षण सफल रहा है। कुछ लोगों पर भी इस्तेमाल किया गया, जिसके परिणाम बेहतर मिले। पेंटेंट कराने की प्रक्रिया चल रही है। एक-दो साल में यह क्रीम बाजार में आ सकती है।
जादुई जड़ी बूटियों के तेल को शोध के जरिये नैनो पार्टिकल में भी बदला जा सकता है। इन नैनो पार्टिकल का आगे बनने वाली क्रीम में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे उसका असर और भी बढ़ जाएगा। कम मात्रा में ही क्रीम ज्यादा प्रभावी होगी।
