
वंदे भारत
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मेरठ से लखनऊ के बीच चल रही वंदे भारत एक्सप्रेस को यात्री नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में ट्रेन का विस्तार वाराणसी स्टेशन तक करने की तैयारी की जा रही है। इससे लखनऊ से वाराणसी जाने वाले यात्रियों को राहत हो जाएगी। साथ ही रेलवे की आमदनी भी बढ़ेगी।
कुछ दिनों पहले ही मेरठ से लखनऊ के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन शुरू किया गया है। मेरठ- लखनऊ वंदे भारत एक्सप्रेस मेरठ से सुबह 6ः35 बजे चलकर दोपहर 1:45 बजे चारबाग स्टेशन पहुंचती है। वापसी में चारबाग स्टेशन से दोपहर 2:45 बजे चलकर रात दस बजे मेरठ पहुंचती है। ट्रेन में औसतन 60 से 65 प्रतिशत तक सीटें खाली चल रही हैं। टिकट महंगा होने के कारण यात्री रूट पर चलने वाली राज्यरानी एक्सप्रेस व नौचंदी को तरजीह दे रहे हैं।
सेमी हाईस्पीड ट्रेन होने के बावजूद वंदे भारत को सात घंटे से अधिक का वक्त मेरठ की दूरी तय करने में लगता है। रेलवे बोर्ड के एक अफसर के मुताबिक ट्रेन को विस्तार देने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत ट्रेन को वाराणसी तक चलाया जा सकता है। इसके लिए फिजिबिलिटी चेक की जा रही है। माना जा रहा है कि ट्रेन के वाराणसी तक विस्तार से यात्रियों की संख्या बढ़ेगी। लखनऊ से वाराणसी के लिए अभी शटल ट्रेन, बरेली वाराणसी सहित कई ट्रेनें हैं, ऐसे में वंदे भारत का संचालन होने से यात्रियों को भी राहत होगी। साथ ही ट्रेन की ऑक्यूपेंसी 80 से 90 प्रतिशत तक पहुंच सकेगी और ट्रेन का संचालन मुनाफे में आ सकेगा।
इतनी सीटें चल रही हैं खाली
गाड़ी संख्या 22489 लखनऊ मेरठ वंदे भारत एक्सप्रेस की चेयरकार में 15, 16 व 18 सितंबर को क्रमशः 281, 289, 360 सीटें रिक्त हैं। जबकि किराया 1300 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, एग्जीक्यूटिव क्लास में इन्हीं तारीखों में क्रमश: 30, 18, 26 सीटें रिक्त हैं। किराया 2365 रुपये है। ट्रेन नंबर 22453 राज्यरानी एक्सप्रेस की बात करें तो उसके चेयरकार, थर्ड व सेकंड एसी में 35 तक वेटिंग है। नौचंदी एक्सप्रेस की स्लीपर से लेकर एसी बोगियों तक में अगले तीन दिन वेटिंग चल रही है। सीटें रिक्त नहीं हैं।
प्रयागराज तक चले तो बने बात
दैनिक यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल का कहना है कि पश्चिमी यूपी से इलाहाबाद उच्च न्यायालय आने-जाने वालों की सुविधा के लिए वंदे भारत का विस्तार प्रयागराज तक किया जाए तो बेहतर रहेगा। चूंकि वाराणसी के लिए काफी ट्रेनें हैं, इसलिए वंदे भारत को प्रयागराज तक चलाने पर विचार किया जाना चाहिए। इसके लिए समयसारिणी ऐसी होनी चाहिए, जिससे हाईकोर्ट जाने वालों को दिक्कतें न हों।
