उत्तर प्रदेश में पान मसाला और तंबाकू उद्योग से जुड़े उद्यमियों ने उत्पादन इकाइयों में अनिवार्य सीसीटीवी कैमरे लगाने और 24 से 48 महीने तक रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की शर्त पर कड़ा एतराज जताया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) को सौंपे गए ज्ञापन में उद्योग ने इस प्रावधान को निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन, असंगत निगरानी व्यवस्था और छोटे व मझोले निर्माताओं पर भारी वित्तीय बोझ बताया है। 

उद्योग का मानना है कि यह प्रावधान कर प्रशासन को सीमित लाभ देगा, जबकि साइबर जोखिम कई गुना बढ़ जाएगा। पान मसाला निर्माताओं ने सीबीआईसी को सीसीटीवी व्यवस्था पर आपत्तियां दर्ज कराते हुए कहा है कि उत्पादन और पैकिंग क्षेत्रों में 24×7 निगरानी कर्मचारियों, प्रबंधन और व्यावसायिक गतिविधियों में अत्यधिक हस्तक्षेप है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त निजता के अधिकार के खिलाफ है। 

रिकॉर्डिंग के उपयोग, भंडारण, एक्सेस और दुरुपयोग को लेकर स्पष्ट सुरक्षा मानकों के अभाव में सांविधानिक चुनौती का खतरा भी बढ़ जाता है। यह भी बताया कि 24 से 48 महीने तक सीसीटीवी डाटा संरक्षित रखने की अनिवार्यता तकनीकी और व्यावसायिक रूप से अव्यावहारिक है।

टेराबाइट्स में जमा होने वाले इस वीडियो डाटा के लिए महंगे सर्वर, सुरक्षित स्टोरेज, साइबर सुरक्षा, बैकअप और मेंटेनेंस की आवश्यकता पड़ती है। यह लागत विशेषकर छोटे और मध्यम निर्माताओं के लिए भारी आर्थिक दबाव बना रही है।



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