उत्तर प्रदेश में अब विक्रेता अपनी दुकान से अलग उर्वरक नहीं बेच सकेंगे। वितरण प्रणाली में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए केंद्र, राज्य सरकार ने एल-1 पीओएस मशीनों की जियो-फेंसिंग को अनिवार्य कर दिया है। किसानों को सही स्थान और समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।

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शासन-प्रशासन के सख्त आदेश और निगरानी के बाद भी कुछ विक्रेता चहेते किसानों को चोरी-छुपे उर्वरक दे देते थे और स्टॉक में उसे खारिज करने के लिए पीओएस मशीन में संबंधित किसानों के घर जाकर अथवा दुकान से अलग हटकर भी उनका अंगूठा मशीन में लगवा लेते थे। निरीक्षण में अधिकारियों को कई बार स्टॉक और उसके खारिज में अंतर भी मिलता था। शासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए इस पर अंकुश लगाने के लिए निर्णय लिया है।

दुकान से दूर काम नहीं करेगी पीओएस मशीन

कृषि निदेशालय ने केंद्र सरकार के उर्वरक विभाग की ओर से जारी पत्र के आधार पर सभी जिलों को एल-1 पीओएस मशीनों की जियो-फेंसिंग प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से 25 नवंबर तक पूरा करके अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। इस व्यवस्था के बाद उर्वरक विक्रेताओं को उपलब्ध कराई एल-1 पीओएस मशीन दुकान से दूर काम नहीं करेगी। जियो-फेंसिंग से समय व लोकेशन भी दर्ज हो जाएगी। जिला कृषि अधिकारी तेगबहादुर सिंह ने सभी उर्वरक विक्रेताओं की जूम बैठक लेकर इसका पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

फैसले की खास बातें


  • किसी केंद्र पर पीओएस मशीन उपलब्ध नहीं है या वह सक्रिय नहीं है तो संबंधित केंद्र की सूची अपडेट कर निदेशालय को भेजी जाएगी।

  • अधिकतम 30–40 सेकंड में जियो-फेंसिंग प्रक्रिया पूर्ण होकर सिस्टम में अपडेट हो जाएगी।

  • भारत सरकार ने उर्वरक वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी पीओएस मशीनों को जियो-फेंसिंग से जोड़ने का निर्णय लिया है।



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