
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
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छोटे कारोबारियों के कारोबार को आर्थिक सुरक्षा देने में उत्तर प्रदेश देश भर में नंबर वन है। किसी भी वजह से बंद होने वाली छोटी इकाइयों को बैंक परेशान न करें, इसकी गारंटी प्रदेश सरकार ने ली है। सुरक्षा के इस दायरे में प्रदेश की 7.33 लाख इकाइयां हैं। ये संख्या गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से बहुत ज्यादा है।
कोरोना ने लाखों कारोबारियों को बर्बाद कर दिया। उत्तर प्रदेश भी इससे अछूता नहीं रहा। तालाबंदी के शिकार सबसे ज्यादा वो एमएसएमई इकाइयां हुईं, जो बैंक लोन के दम पर चल रही थीं। बंदी के कारण कारोबार ठप हो गया और लोन न चुका पाने के कारण उनका दिवाला निकल गया। इस तरह के हालात का दोहराव रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने ज्यादा से ज्यादा छोटे उद्यमियों को अपनी गारंटी दी है। यानी लोन न चुका पाने की सूरत में सरकार बैंकों को भरपाई करेगी।
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एक करोड़ से 50 करोड़ रुपये तक की इकाइयां दायरे में
भारत सरकार की योजना क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्माल इंटरप्राइजेज (सीजीटीएमएसई) के तहत यूपी सरकार ने छोटी इकाइयों की सुरक्षा की गारंटी ली है। राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में यूपी सबसे आगे है। 37 राज्यों ने 67 लाख इकाइयों की बैंकों से लिए गए उधार की गारंटी ली है। इसमें 7.33 लाख इकाइयां अकेले यूपी की हैं। संकट में आने पर इन इकाइयों द्वारा बैंकों से लिए गए 4,000 करोड़ रुपये लोन की भरपाई प्रदेश सरकार करेगी। इकाइयों की सुरक्षा की गारंटी लेने के मामले में आंध्र प्रदेश (5.83 लाख), तमिलनाडु (5.83 लाख), महाराष्ट्र (5.40 लाख) और कर्नाटक (4.92 लाख) हैं। बिहार में केवल 2.66 लाख, मध्य प्रदेश में 3.47 लाख और राजस्थान में 2.76 लाख इकाइयां ही सुरक्षा के दायरे में हैं।
एमएसएमई का दायरा-
सूक्ष्म इकाइयां : एक करोड़ रुपये तक का निवेश और पांच करोड़ रुपये तक का टर्नओवर
लघु इकाइयां : दस करोड़ रुपये तक का निवेश और 50 करोड़ रुपये तक का टर्नओवर
मध्यम इकाइयां : 50 करोड़ रुपये तक का निवेश और 250 करोड़ रुपये तक का टर्नओवर
इन जिलों में सरकारी गारंटी वाली इकाइयां
जिला गारंटी वाली इकाइयां
लखनऊ 43,548
आगरा 34,536
वाराणसी 32,984
कानपुर 31,786
मुरादाबाद 30,511
गोरखपुर 22,437
गाजियाबाद 20,633
मेरठ 17,767
गौतमबुद्धनगर 14,761