उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में राजधानी लखनऊ के 1500 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों के खुलने और बंद होने के समय जाम की गंभीर समस्या दूर करने के लिए कम से कम 10 प्रशिक्षित मार्शलों की तैनाती का प्रस्ताव पेश किया गया। कोर्ट में पेश हुए डीसीपी ट्रैफिक ने अदालत को बताया कि इसके लिए वह इन मार्शलों को प्रशिक्षित करने के लिए तैयार हैं, जो स्कूलों के अंदर और बाहर यातायात की व्यवस्था संभालेंगे।

कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वह इस मामले पर गौर करके यातायात की समस्या दूर करने के लिए विभिन्न विकास एजेंसियों से जानकारी लेकर अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा पेश करें। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को नियत की है।

छात्राओं को परेशान किए जाने पर भी चिंता व्यक्त की

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवर बैंक के निवासियों की ओर से वर्ष 2020 में दाखिल की गई जनहित याचिका पर दिया है। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्कूलों की वजह से लगने वाले जाम की समस्या से निजात के संबंध में पूर्व में कई आदेश दिए हैं। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने बालिका स्कूलों की छात्राओं को परेशान किए जाने पर भी चिंता व्यक्त की थी।

बीती 17 जनवरी को मामले की सुनवाई के समय एडीजी ट्रैफिक ए. सतीश गणेश और डीसीपी ट्रैफिक कमलेश दीक्षित कोर्ट में पेश हुए और मार्शलों की तैनाती का प्रस्ताव दिया। यह भी सुझाव दिया कि स्कूलों को अंदर-बाहर यातायात व्यवस्था नियंत्रित करने की जिम्मेदारी देने के लिए दिशा-निर्देश बनाए जा सकते हैं। 

कोर्ट ने पूछा 

नए स्कूलों के निर्माण की स्वीकृति देते वक्त क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है? विकास एजेंसियां मंजूरी देते समय यातायात के पहलू पर ध्यान दे रहीं हैं या नहीं? इसकी जानकारी भी अगली सुनवाई में पेश की जाए।



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