देशभर के सेवारत परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में दिल्ली में सोमवार से प्रदर्शन शुरू होगा। विभिन्न शिक्षकों के संगठन अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर से 24 नवंबर को जंतर-मंतर पर धरना दिया जाएगा। इसके लिए काफी संख्या में शिक्षक प्रदेश से भी रविवार को रवाना हुए। जबकि शिक्षक-कर्मचारियों के संयुक्त संगठन एनएमओपीएस की ओर से मंगलवार 25 नवंबर को दिल्ली में धरना प्रदर्शन किया जाएगा।

भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा में शामिल यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि देशभर के 22 राज्यों के शिक्षक संगठन इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र में आरटीई लागू होने से पहले से नियुक्त शिक्षकों को इससे छूट देने की मांग की है।

वहीं दूसरी तरफ नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के 25 नवंबर को होने वाले प्रदर्शन के लिए रविवार को दिल्ली में हुई बैठक में रणनीति तैयार की गई। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बन्धु ने कहा कि दिल्ली में देशभर के शिक्षक-कर्मचारी और अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण और टीईटी अनिवार्यता की समाप्ति के लिए अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे।

उन्होंने कहा कि संगठन की लड़ाई के फलस्वरूप चार राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन लागू हुई है। वहीं पंजाब में ओपीएस बहाली की घोषणा हुई है।देश भर का शिक्षक टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ है, केंद्र सरकार इसे निरस्त करने का निर्णय ले। संसद में इससे संबंधित कानून लाए। संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह बताया गया कि देश भर से शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी 25 नवंबर को दिल्ली के लिए कूच कर रहे हैं। बैठक में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रामानुजय पलेला, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वितेश खांडेकर, शांताराम तेजा, विजेंदर सिंह धारीवाल, विक्रांत सिंह, प्रदीप ठाकुर, सैय्यद दानिश इमरान, डॉ. नीरजपति त्रिपाठी आदि उपस्थित थे।



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